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मुख्यमंत्री मोहन यादव से कार्यपालन यंत्री की तो शिक्षा मंत्री से होगी पकरिया स्थित ग्रेस मिशन इंग्लिश मीडियम स्कूल की शिकायत, किसानों के साथ हों रहा छल , ग्रेस मिशन इंग्लिश मीडियम स्कूल काट रहा मलाई

 मुख्यमंत्री मोहन यादव से कार्यपालन यंत्री की तो शिक्षा मंत्री से होगी पकरिया स्थित ग्रेस मिशन इंग्लिश मीडियम स्कूल की शिकायत, किसानों के साथ हों रहा छल , ग्रेस मिशन इंग्लिश मीडियम स्कूल काट रहा मलाई



ढीमरखेड़ा |  उमरियापान के समीप बिछिया माइनर नहर के ऊपर पकरिया में ग्रेस मिशन इंग्लिश मीडियम स्कूल द्वारा सड़क निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह सड़क पूरी तरह से निजी संस्थान के उपयोग के लिए बनाई जा रही है, जबकि इस मार्ग का ग्रामीणों से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि विभागीय अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन के बीच सांठगांठ कर यह कार्य कराया जा रहा है। मामले में कार्यपालन यंत्री नर्मदा विकास संभाग क्र-4 सिहोरा, जिला जबलपुर की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। जब इस सड़क निर्माण को लेकर कार्यपालन यंत्री से सवाल किया गया तो उन्होंने पहले कहा कि उन्होंने स्कूल को किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं दी है और मामले की जांच करेंगे। लेकिन जब इस मामले ने तूल पकड़ा, तो उन्होंने अपने बयान बदलते हुए कहा कि सड़क निर्माण की अनुमति देने का अधिकार उनके पास नहीं है, बल्कि उन्होंने सिर्फ मुरुम डालने की अनुमति दी है।

*सड़क निर्माण में नियमों की अनदेखी*

हालांकि, मौके पर देखा गया कि पहले बड़े-बड़े बोल्डर (पत्थर) डाले गए और फिर जेसीबी मशीन द्वारा मुरुम बिछाई गई। इससे साफ जाहिर होता है कि यहाँ एक मजबूत सड़क तैयार की जा रही है। नहर की मेढ़ पर इस तरह से सड़क निर्माण किए जाने से नहर का स्वरूप बदल गया है और यह जर्जर भी हो गई है। बारिश के दौरान यदि नहर को अधिक दबाव सहना पड़ा, तो इसके ढहने की संभावना प्रबल हो जाती है। कार्यपालन यंत्री ने दावा किया कि उन्होंने मौका स्थल का निरीक्षण किया और वहाँ केवल मुरुम डाली गई है। लेकिन ग्रामीणों के अनुसार, पहले गड्ढे खोदे गए, फिर बोल्डर डाले गए और उसके बाद मुरुम बिछाई गई। अब स्कूल प्रबंधन अपनी जाली तोड़कर गेट बनाने की तैयारी कर रहा है, जिससे साफ जाहिर होता है कि यह सड़क केवल स्कूल के लाभ के लिए बनाई जा रही है। ग्रामीणों ने कार्यपालन यंत्री पर आरोप लगाया है कि उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर निजी संस्थान को लाभ पहुंचाने के लिए अनुमति दी, जबकि यह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात है।

*कार्यपालन यंत्री संदेह के घेरे में*

इस पूरे मामले में कार्यपालन यंत्री अनिल तिवारी की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है। सवाल उठता है कि शासन की भूमि पर किसी निजी संस्थान के लिए सड़क बनाने की अनुमति कैसे दी जा सकती है? जब यह मामला अखबारों में उजागर हुआ, तो पहले उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई अनुमति नहीं दी, फिर बोले कि उन्होंने सिर्फ मुरुम डालने की अनुमति दी है। लेकिन मौके पर जो भारी-भरकम बोल्डर देखे गए, उससे यह स्पष्ट हो गया कि यह एक ठोस सड़क का निर्माण किया जा रहा है। अगर कार्यपालन यंत्री ने केवल मुरुम डालने की अनुमति भी दी है, तो यह भी नियमों के विरुद्ध है क्योंकि नहर की मेढ़ पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करना प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है।

*वरिष्ठ अधिकारियों से होगी शिकायत*

इस मामले में अब ग्रामीणों ने वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करने की योजना बनाई है। ग्रेस मिशन स्कूल प्रबंधन और कार्यपालन यंत्री अनिल तिवारी की सांठगांठ से शासन की भूमि का अवैध रूप से उपयोग कर निजी संस्थान को लाभ पहुँचाया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा कार्यपालन यंत्री को पत्र लिखे जाने के कुछ ही दिनों के भीतर कार्य की अनुमति दे दी गई। यह प्रथम दृष्टया एक गहरी साजिश की ओर इशारा करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि न तो विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया गया और न ही कोई पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई। इससे स्पष्ट होता है कि कार्यपालन यंत्री और स्कूल प्रबंधन ने इस संबंध में मिलीभगत कर ली है। अब क्षेत्रीय नागरिक इस मामले में प्रधान कार्यालय, जबलपुर में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। इस पूरे मामले में साफ जाहिर होता है कि कार्यपालन यंत्री अनिल तिवारी और ग्रेस मिशन स्कूल प्रबंधन के बीच मिलीभगत से सरकारी भूमि का दुरुपयोग किया गया है। नहर की मेढ़ पर सड़क निर्माण कर स्कूल को निजी लाभ पहुँचाने का कार्य किया जा रहा है। कार्यपालन यंत्री ने अपने ही बयान बदलकर अपनी संदिग्ध भूमिका को और स्पष्ट कर दिया है। ग्रामीणों की माँग है कि इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

*इनका कहना है*

"पहले कहा सड़क निर्माण के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। हमने कोई अनुमति नहीं दी है। फिर बोले कि सड़क निर्माण की अनुमति देने का अधिकार मुझे नहीं है, केवल मुरुम डालने की अनुमति दी है। यदि पत्थर डाले गए हैं, तो जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।"

*अनिल तिवारी, कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास, संभाग क्र.-4 सिहोरा*

"सड़क का अस्थायी निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इसके लिए संबंधित विभाग से बाकायदा परमिशन ली गई है, फिर काम शुरू किया गया है।"

*अंजली जैकब, प्राचार्य, ग्रेस मिशन स्कूल*

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