सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

शिक्षक महेंद्र सिंह निःस्वार्थ सेवा और समर्पण का प्रतीक, अन्य शिक्षको को लेना चाहिए इनसे प्रेरणा

 शिक्षक महेंद्र सिंह निःस्वार्थ सेवा और समर्पण का प्रतीक, अन्य शिक्षको को लेना चाहिए इनसे प्रेरणा



ढीमरखेड़ा |  शीर्षक पढ़कर दंग मत होना यह कहानी है शिक्षक महेंद्र सिंह की, शिक्षा समाज का आधार होती है, और शिक्षक उस नींव को सुदृढ़ करने वाले कारीगर होते हैं। शिक्षक महेंद्र सिंह एक ऐसे ही शिक्षाविद् हैं, जो अपने निःस्वार्थ सेवा और समर्पण से शिक्षा जगत में एक मिसाल बन चुके हैं। वे उन गिने-चुने शिक्षकों में से एक हैं, जो अपने निजी संसाधनों का उपयोग करके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

*शिक्षा का प्रकाश फैलाने वाले महेंद्र सिंह*

महेंद्र सिंह ने अपने जीवन को शिक्षा के प्रसार और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए समर्पित कर दिया है। उन्होंने गौरा स्कूल को एक ऐसे स्थान में बदल दिया है, जहां बच्चों को न केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा मिलती है, बल्कि वे संस्कार, अनुशासन, और नैतिक मूल्यों से भी परिचित होते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि जब एक शिक्षक सच्चे मन से अपने कर्तव्यों का पालन करता है, तो वह शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है।

*अपने खर्चे पर बच्चों को शिक्षा देने का प्रयास*

जहां अधिकांश शिक्षक केवल सरकार द्वारा निर्धारित संसाधनों पर निर्भर रहते हैं, वहीं महेंद्र सिंह ने अपनी मेहनत की कमाई को बच्चों की शिक्षा में लगाने का संकल्प लिया। उन्होंने अपने पैसे से स्कूल में सुविधाएं विकसित कीं, शिक्षण सामग्री खरीदी, और गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा प्रदान करने का बीड़ा उठाया। उनका यह प्रयास यह दिखाता है कि एक शिक्षक के प्रयासों से शिक्षा का स्तर कैसे सुधर सकता है।

*गौरा स्कूल शिक्षा का आदर्श केंद्र*

महेंद्र सिंह ने गौरा स्कूल को एक देखने लायक स्थान बना दिया है। यह स्कूल केवल एक शैक्षिक संस्थान नहीं, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत बन चुका है। उन्होंने स्कूल की भौतिक संरचना को मजबूत किया, कक्षाओं को सुंदर बनाया, और बच्चों के लिए एक प्रेरणादायक वातावरण तैयार किया। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि आज इस स्कूल के छात्र न केवल पढ़ाई में आगे हैं, बल्कि वे सामाजिक और नैतिक दृष्टिकोण से भी मजबूत हैं।

*बच्चों के दिलों में बसते हैं शिक्षक महेंद्र सिंह*

किसी भी शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि यह होती है कि वह अपने छात्रों के दिलों में जगह बना सके। महेंद्र सिंह इस कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरते हैं। उनके छात्र उन्हें एक मार्गदर्शक, संरक्षक और अभिभावक के रूप में देखते हैं। उनका पढ़ाने का तरीका, बच्चों को प्रेरित करने की क्षमता और उनके प्रति उनका प्रेम उन्हें अन्य शिक्षकों से अलग बनाता है।

*अन्य शिक्षकों के लिए एक आदर्श*

महेंद्र सिंह का समर्पण उन सभी शिक्षकों के लिए एक प्रेरणा है, जो शिक्षा को केवल एक नौकरी के रूप में देखते हैं। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि शिक्षक अपने दायित्व को पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाएं, तो वे शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। अन्य शिक्षकों को उनसे सीख लेनी चाहिए और अपने स्तर पर शिक्षा को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए। महेंद्र सिंह जैसे शिक्षक समाज के लिए एक अनमोल धरोहर हैं। उनके प्रयासों से न केवल कई बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो रहा है, बल्कि वे संपूर्ण शिक्षा प्रणाली के लिए एक मिसाल कायम कर रहे हैं। उनका समर्पण, निःस्वार्थ सेवा और शिक्षा के प्रति उनका जुनून हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि यदि हर शिक्षक उनके जैसा समर्पण दिखाए, तो हमारा देश शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

टिप्पणियाँ

popular post

नहर में बैठा यमराज छोटे - छोटे बच्चों को बना रहा शिकार, नहर ले रही बली नर्मदा नहर उमरियापान में डूबी बच्चियां, दो की मौत, अन्य की तलाश जारी

 नहर में बैठा यमराज छोटे - छोटे बच्चों को बना रहा शिकार, नहर ले रही बली नर्मदा नहर उमरियापान में डूबी बच्चियां, दो की मौत, अन्य की तलाश जारी ढीमरखेड़ा |  उमरियापान के समीप नर्मदा नहर में तीन बच्चियों के डूबने की दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना में दो बच्चियों की मौत हो चुकी है, जबकि तीसरी बच्ची की तलाश जारी है। यह हादसा रविवार की सुबह हुआ जब तीनों बच्चियां नहर में नहाने गई थीं। मृतक बच्चियों की पहचान सिद्धि पटेल (12 वर्ष, कक्षा आठवीं) एवं अंशिका पटेल (14 वर्ष, कक्षा नवमी) के रूप में हुई है, जबकि सिद्धि की छोटी बहन मानवी पटेल (8 वर्ष) अब भी लापता है। इस हृदयविदारक घटना के बाद गांव में मातम पसर गया है। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है, और प्रशासनिक अमला लगातार तीसरी बच्ची की तलाश में जुटा हुआ है।रविवार की सुबह परसवारा गांव की तीन बच्चियां उमरियापान के समीप नर्मदा नहर में नहाने के लिए गई थीं। नहर का पानी गहरा होने के कारण तीनों बच्चियां उसमें डूबने लगीं। आस-पास कोई मौजूद नहीं था, जिससे उन्हें तुरंत बचाया नहीं जा सका। कुछ देर बाद जब स्थानीय लोगों...

पुलिस विभाग के बब्बर शेर, सहायक उप निरीक्षक अवध भूषण दुबे का गौरवशाली पुलिस जीवन, 31 मार्च को ढीमरखेड़ा थाने से होगे सेवानिवृत्त, सेवानिवृत्त की जानकारी सुनके आंखे हुई नम

 पुलिस विभाग के बब्बर शेर, सहायक उप निरीक्षक अवध भूषण दुबे का गौरवशाली पुलिस जीवन, 31 मार्च को ढीमरखेड़ा थाने से होगे सेवानिवृत्त,  सेवानिवृत्त की जानकारी सुनके आंखे हुई नम  ढीमरखेड़ा |   "सच्चे प्रहरी, अडिग संकल्प, निर्भीक कर्म" इन शब्दों को अगर किसी एक व्यक्ति पर लागू किया जाए, तो वह हैं अवध भूषण दुबे। अपराध की दुनिया में जिनका नाम सुनते ही अपराधियों के दिल कांप उठते थे, आम जनता जिन्हें एक रक्षक के रूप में देखती थी, और जिनकी उपस्थिति मात्र से ही लोग सुरक्षित महसूस करते थे ऐसे थे ढीमरखेड़ा थाने के सहायक उप निरीक्षक अवध भूषण दुबे। 01 मार्च 1982 को जब उन्होंने मध्य प्रदेश पुलिस की सेवा में कदम रखा था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह व्यक्ति आने वाले चार दशकों तक अपने साहस, कर्तव्यपरायणता और निडरता के लिए बब्बर शेर के नाम से जाना जाएगा। 43 वर्षों से अधिक की सेवा के बाद, 31 मार्च 2025 को वे ढीमरखेड़ा थाने से सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन उनके किए गए कार्य और उनकी यादें हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी। *अपराधियों के लिए काल "बब्बर शेर"* अपराध की दुनिया में कुछ प...

सिलौड़ी मंडल अध्यक्ष मनीष बागरी, दोस्ती की मिसाल, जिसने बचाई सौरभ मिश्रा की जान, मुंबई में आया सौरभ मिश्रा को अटैक अब हैं सुरक्षित, तुझे कैसे कुछ हों सकता हैं मेरे भाई तेरे ऊपर करोड़ो लोगो की दुआएं हैं काल भी उसका क्या बिगाड़े जिसकी रक्षा महाकाल करते हों

 सिलौड़ी मंडल अध्यक्ष मनीष बागरी, दोस्ती की मिसाल, जिसने बचाई सौरभ मिश्रा की जान, मुंबई में आया सौरभ मिश्रा को अटैक अब हैं सुरक्षित, तुझे कैसे कुछ हों सकता हैं मेरे भाई तेरे ऊपर करोड़ो लोगो की दुआएं हैं काल भी उसका क्या बिगाड़े जिसकी रक्षा महाकाल करते हों  ढीमरखेड़ा |  मुंबई जैसे बड़े महानगर में जीवन हमेशा व्यस्त और तेज़ गति से चलता है, लेकिन इसी बीच एक घटना घटी जिसने यह साबित कर दिया कि सच्ची दोस्ती किसी भी परिस्थिति में अपने दोस्त के लिए हर हद पार कर सकती है। सिलौड़ी मंडल अध्यक्ष मनीष बागरी ने अपने दोस्त सौरभ मिश्रा के लिए जो किया, वह न सिर्फ दोस्ती की मिसाल बन गया, बल्कि यह भी दिखाया कि इंसानियत और प्रेम से बड़ा कुछ भी नहीं। सौरभ मिश्रा मुंबई में थे, जब अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। बताया जाता है कि उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी जान पर खतरा बन गया था। जैसे ही यह खबर सिलौड़ी मंडल अध्यक्ष मनीष बागरी तक पहुंची, उन्होंने बिना किसी देरी के मुंबई जाने का फैसला किया। वह तुरंत हवाई जहाज से मुंबई रवाना हो गए, क्योंकि उनके लिए उनका दोस्त सबसे महत्वपूर...