वर्तमान प्रभारी प्राचार्य पी. एम. श्री शासकीय स्कूल गोपालपुर अनिल कुम्हार बिना वजह परेशान करवा रहे हैं शिक्षक गणेश यादव को आपसी रंजिश के कारण करवा रहे हैं शिकवा शिकायत शिक्षक गणेश यादव की, शिक्षक गणेश यादव प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं इनकी छवि धूमिल करने के लिए किया जा रहा हैं साजिश का उपयोग मानसिक रुप से किया जा रहा है परेशान
वर्तमान प्रभारी प्राचार्य पी. एम. श्री शासकीय स्कूल गोपालपुर अनिल कुम्हार बिना वजह परेशान करवा रहे हैं शिक्षक गणेश यादव को आपसी रंजिश के कारण करवा रहे हैं शिकवा शिकायत शिक्षक गणेश यादव की, शिक्षक गणेश यादव प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं इनकी छवि धूमिल करने के लिए किया जा रहा हैं साजिश का उपयोग मानसिक रुप से किया जा रहा है परेशान
ढीमरखेड़ा | शिक्षा का क्षेत्र एक सम्माननीय पेशा माना जाता है, जहाँ शिक्षक राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन जब एक शिक्षक को बेवजह प्रताड़ित किया जाता है, तो यह केवल उस व्यक्ति की समस्या नहीं रहती, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो जाता है। वर्तमान में पी. एम. श्री शासकीय स्कूल, गोपालपुर के प्रभारी प्राचार्य अनिल कुम्हार द्वारा शिक्षक गणेश यादव को अनावश्यक रूप से परेशान करने की घटनाएं सामने आ रही हैं। यह पूरी स्थिति एक आपसी रंजिश का परिणाम प्रतीत होती है, जहाँ गणेश यादव की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की साजिश रची जा रही है।
*शिक्षक गणेश यादव एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व*
शिक्षक गणेश यादव न केवल एक शिक्षाविद् हैं, बल्कि समाज में एक सम्माननीय व्यक्ति भी माने जाते हैं। उनके कार्यों की सराहना उनके सहकर्मी और विद्यार्थी दोनों करते आए हैं। उनकी अध्यापन शैली, उनकी व्यवहारिकता और शिक्षा के प्रति उनकी निष्ठा के कारण वे हमेशा एक प्रेरणा स्रोत बने रहे हैं। उनके खिलाफ की जा रही शिकायतें और परेशान करने के प्रयास इस तथ्य को उजागर करते हैं कि किसी निहित स्वार्थ के तहत उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
*आपसी रंजिश का प्रभाव*
आपसी रंजिश के कारण किसी शिक्षक को बेवजह परेशान किया जाना, शिक्षा जगत के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। यदि कोई व्यक्तिगत विवाद है, तो उसे सुलझाने के लिए उचित माध्यमों का उपयोग किया जाना चाहिए, न कि किसी शिक्षक को मानसिक उत्पीड़न का शिकार बनाया जाना चाहिए। प्रभारी प्राचार्य अनिल कुम्हार द्वारा गणेश यादव के खिलाफ शिकायतें दर्ज करवाना, उनकी छवि को धूमिल करने का एक सुनियोजित प्रयास प्रतीत होता है। यह न केवल एक शिक्षक के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाता है, बल्कि विद्यार्थियों की शिक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
*मानसिक प्रताड़ना के प्रभाव*
जब किसी व्यक्ति को बार-बार बेवजह परेशान किया जाता है, तो उसका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। शिक्षक गणेश यादव को जिस तरह से परेशान किया जा रहा है, वह उनके मनोबल को गिराने का प्रयास है। यह भी देखा गया है कि मानसिक प्रताड़ना से व्यक्ति की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे वे अपने कार्य में पूरी तरह से मन नहीं लगा पाते। एक शिक्षक जो विद्यार्थियों को शिक्षित करने का कार्य करता है, यदि वह खुद ही मानसिक रूप से परेशान रहेगा, तो इसका असर उसकी अध्यापन शैली पर पड़ेगा।
*शिक्षा तंत्र पर प्रभाव*
शिक्षा का तंत्र तभी सुदृढ़ रह सकता है जब शिक्षक बिना किसी दबाव और भय के अपना कार्य कर सकें। यदि किसी शिक्षक को प्रताड़ित किया जाता है, तो यह अन्य शिक्षकों में भी असुरक्षा की भावना उत्पन्न कर सकता है। इससे शिक्षा व्यवस्था में अविश्वास बढ़ता है और एक सकारात्मक वातावरण बनाने में बाधा उत्पन्न होती है। यदि प्रभारी प्राचार्य अनिल कुम्हार द्वारा गणेश यादव को लगातार परेशान किया जा रहा है, तो यह पूरे शैक्षिक संस्थान के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। इस स्थिति को देखते हुए, प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है। किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत रंजिश को शिक्षा प्रणाली में स्थान नहीं दिया जाना चाहिए। यदि शिक्षक गणेश यादव के खिलाफ कोई अनुचित शिकायत की गई है, तो उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि यह सिद्ध होता है कि उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है, तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। शिक्षा विभाग को इस मामले की जांच करानी चाहिए और यदि शिक्षक गणेश यादव को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, तो प्रभारी प्राचार्य पर उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। गणेश यादव को मानसिक तनाव से बाहर निकालने के लिए उन्हें उचित काउंसलिंग दी जानी चाहिए ताकि वे पुनः अपने शिक्षण कार्य में मन लगा सकें। अन्य शिक्षकों को भी यह आश्वासन दिया जाना चाहिए कि वे किसी भी प्रकार की प्रताड़ना के शिकार नहीं होंगे और यदि कोई उनके खिलाफ अनुचित कार्य करेगा, तो उचित कार्रवाई की जाएगी। शिक्षक गणेश यादव के प्रति हो रही प्रताड़ना केवल उनका व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक गंभीर विषय है। यदि ऐसे मामलों को नजरअंदाज किया जाता है, तो इससे न केवल शिक्षक समुदाय का मनोबल टूटेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होगी। प्रशासन को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और उचित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत रंजिश और अन्याय को समाप्त किया जा सके।
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