कलेक्टर दिलीप कुमार यादव को करना चाहिए ध्यान आकर्षित, करवाना चाहिए एफ. आई. आर , ग्राम पंचायत धरवारा में बन रही अवैध कॉलोनी, अधिकारी मौन राजस्व अधिकारियों का अवैध कॉलोनाईजर को संरक्षण बिना मद परिवर्तन के बना दी गई कॉलोनी, अब मूलभूत सुविधाओ का नागरिक कर रहे इंतजार , मकान बनाने वालों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा, अधिकारी कर रहे सिर्फ नोटिस जारी
कलेक्टर दिलीप कुमार यादव को करना चाहिए ध्यान आकर्षित, करवाना चाहिए एफ. आई. आर , ग्राम पंचायत धरवारा में बन रही अवैध कॉलोनी, अधिकारी मौन
राजस्व अधिकारियों का अवैध कॉलोनाईजर को संरक्षण
बिना मद परिवर्तन के बना दी गई कॉलोनी, अब मूलभूत सुविधाओ का नागरिक कर रहे इंतजार , मकान बनाने वालों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा, अधिकारी कर रहे सिर्फ नोटिस जारी
ढीमरखेड़ा । शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से कॉलोनी काटने का कार्य चल रहा है, लेकिन इन पर कार्रवाई करने की जगह सिर्फ नोटिस जारी किए जाते हैं।कॉलोनाइजर तो प्लाट बेचकर अपना काम पूरा कर लेते हैं और खामियाजा वहां रहने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है। कॉलोनी वैध कराने की प्रक्रिया लंबी होने और टैक्स देने कॉलोनाइजर बचते हैं। इसी क्रम में स्लीमनाबाद तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम धरवारा में अवैध रूप से कॉलोनी बनाने का कार्य जोरो से जारी है। इस संबंध में ग्राम पंचायत धरवारा के द्वारा कलेक्टर कटनी को शिकायत सौंपकर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की मांग की गई है।शिकायत में बताया गया कि ग्राम पंचायत धरवारा अंतर्गत खसरा क्रमांक 540 में कटनी निवासी चक्रधर पिता श्रीधर बड़गैया, विजय प्रताप पिता कल्याण दास गुरवानी रामलाल पिता राधा सिंह कुशवाहा द्वारा विगत 5-6 वर्ष पूर्व से एक वृहत स्तर लगभग 3-4 एकड़ भूमि पर बिना अनुज्ञा व सक्षम अधिकारी की अनुमति से अवैध कालौनी विकसित की जा रही है। उक्त कृषि भूमि को बिना आवासीय डायवर्सन कराए व बिना आवासीय भूमि में तब्दील करवाए अवैध प्लाटिंग कर अनेकों लोगों को प्रति वर्ग फुट की दर से विक्रय की गई है व शेष भूमि का विक्रय कार्य निरंतर जारी है, उक्त विक्रय की गई भूमि में कुछ खरीददारों के नामांतरण हो चुके हैं कुछ के नामांतरण होना बाकी है। अवैध कॉलोनी विकसित होने से ग्राम पंचायत धरवारा को जनमानस सुविधा देने में व्यापक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
*भू-माफियाओं ने सड़क तक नहीं छोड़ी*
सूत्रों ने बताया कि ग्राम पंचायत धरवारा अंतर्गत अवैध रूप से कॉलोनी का निर्माण करने वाले भू-माफियाओं के द्वारा सड़क एवं मूलभूत सुविधाएं तक कॉलोनीवासियों को नहीं दी गई, जो सड़क छोड़ी भी गई है वह इन तथाकथित कालोनाईजरों के नाम पर ऐसे में ग्राम पंचायत मूलभूत सुविधाएं क्यों उपलब्ध कराये। कॉलोनाईजर के द्वारा कॉलोनी के नाम पर सिर्फ बोर्ड लगा दिया गया है और दिखाबे के लिए एक सड़क बना दी गई है। प्लाट बिकने के बाद जब लोग यहां मकान बनाते हैं, तो सड़क, नाली, बिजली, पानी जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझते हैं। पूर्व में कटी अवैध कॉलोनी जहां मकान बन गए हैं, उनमें आज भी सड़क नाली नहीं बन पाई है। कच्ची सड़कों पर गंदा पानी बह रहा है, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। कॉलोनियों में पार्क बनाना तो दूर उसके लिए जगह तक नहीं छोड़ी जाती है। परेशान लोग सुविधाओं की मांग को लेकर ग्राम पंचायत धरवारा के चक्कर काट रहे है लेकिन फिर भी अधिकारी संबंधित कॉलोनाइजर पर कार्रवाई नहीं करते हैं और मूलभूत सुविधाओं के नाम पर अवैध कॉलोनी में सड़क, पानी, प्रकाश की व्यवस्था कर रहे हैं। यदि अवैध कॉलोनी की शुरूआत में ही कार्रवाई की जाए, तो इस पर रोक लग सकती है।
*बिना अनुज्ञा व सक्षम अधिकारी की अनुमति हो रही प्लाटिंग*
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम धरवारा में कटनी निवासी चक्रधर पिता श्रीधर बड़गैया, विजय प्रताप पिता कल्याण दास गुरवानी रामलाल पिता राधा सिंह कुशवाहा द्वारा विगत 5-6 वर्ष पूर्व से अवैध रूप से कॉलोनी बनाने का कार्य किया जा रहा है जिसमें इनके द्वारा न कॉलोनईजर का लायसेंस प्राप्त किया गया है और न ही सक्षम अधिकारी की अनुमति, भू-माफियाओं के द्वारा पंचायत तक से अनुमति लेना उचित नहीं समझी गई है। लिहाजा इनके इस विधि विरूद्ध कार्य में कुछ राजस्व अधिकारियों का भी संरक्षण है जिस कारण से इनके विरूद्ध कार्यवाही नहीं की जा रही है। जबकि इनके द्वारा कई रजिस्टर्ड विक्रय पत्र निष्पादित किए गए। यह विक्रय आवासीय प्रयोजन की दृष्टि से किया गया है, जो अवैध प्लाटिंग की श्रेणी में आता है। भूमि को सक्षम अनुमति के बिना भू-खंडों में विभाजित कर भिन्न-भिन्न व्यक्तियों को आवासीय प्रयोजन के लिए विक्रय किया है। वर्गफीट में भूमि का विक्रय किए जाने से प्रथम दृष्टया अनाधिकृत कॉलोनी निर्माण दृष्टिगत होता है जो ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 का घोर उल्लघंन है। बिना पंचायत की अनुमति लिये किसी तरह का कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है।
*मूलभूत सुविधाओं के लिये पंचायत पर बना रहे दबाव*
अवैध कॉलोनाईजरों एवं अधिकारियों के द्वारा कृषि भूमि पर कॉलोनी का निर्माण तो करवा दिया गया है लेकिन अब मूलभूत सुविधाओं के लिये वहां के निवासियों के द्वारा ग्राम पंचायत पर दबाव बनाया जा रहा है लेकिन सवाल यह उठता है कि जब कॉलोनाईजरों के द्वारा पंचायत से अनुमति नहीं ली गई तो पंचायत किस हैसियत से वहां पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराये और वैसे भी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना कॉलोनाईजर का काम है न की पंचायत का?
*कार्रवाई न होने से अवैध कॉलोनियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही हैं*
ऐसे अधिकांश मामलों में तथाकथित अधिकारियों के द्वारा कॉलोनाईजरों के द्वारा सांठगांठ कर ली जाती है जिस कारण से कुकरमुत्तों की तरह ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध कॉलोनाईजरों के द्वारा कॉलोनियों का निर्माण करवाया जा रहा है जिसका एकमात्र उद्देश्य धन कमाना है इनको नागरिकों की समस्याओं और उनके मूलभूत सुविधाओं से किसी तरह का कोई सरोकार नहीं है।
*इनका कहना है*
इस मामले में तहसीलदार को जांच के लिये आदेशित किया जायेगा। बिना निर्धारित प्रक्रिया को अपनाकर कॉलोनी का निर्माण नहीं किया जा सकता है। यदि ऐसा है तो वह विधि विरूद्ध है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर आगामी कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।
*राकेश चौरसिया ,अनुविभागीय अधिकारी बहोरीबंद*
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