सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सहकारी समिति उमरियापान के लेखापाल के विक्रेता मुन्ना विश्वकर्मा की खुल रही पोल, राशन में चालू हैं काला - बाजारी

 सहकारी समिति उमरियापान के लेखापाल के विक्रेता मुन्ना विश्वकर्मा की खुल रही पोल, राशन में चालू हैं काला - बाजारी



उमरियापान |  लेखापाल मुन्ना विश्वकर्मा का पद लेखापाल का केवल नाम के लिए हैं जो कि लेखापाल के पद की गरिमा को ताक में रखकर काम किया जा रहा हैं। लेखापाल के पद में पदस्थ रहते हुए लेखापाल का काम तो इनके द्वारा नहीं किया जाता बल्कि राशन को भी नियमों को दरकिनार करके बाटां जाता हैं। सूत्र बताते हैं कि इनके द्वारा नमक का वितरण तो किया ही नहीं जाता लिहाज़ा राशन का वितरण जब लास्ट अवधी में पहुंच जाता हैं तो इनके द्वारा पैसों के माध्यम से जरूरत - मंदो को राशन बेचा जाता हैं। शासन के नियमानुसार राशन को बेचने वाले और खरीदने वाले पर सख्त कार्यवाही के निर्देश हैं। लेकिन लेखापाल विक्रेता मुन्ना विश्वकर्मा को इससे क्या करना अपनी मनमर्जी के मुताबिक़ इनके द्वारा कार्य किया जाता हैं। 

*साजिश के तहत पुत्र को बना दिया सहायक*

फिंगर का कार्य मुन्ना विश्वकर्मा के द्वारा नहीं किया जाता बल्कि इनके पुत्र के द्वारा फिंगर लगवाएं जाते हैं। इनके बच्चें के पास बात करने का भी लहज़ा नहीं हैं गरीब तबके के ग्रामीणों से अभद्र भाषा में बात की जाती हैं। समझ से परे यह बात हैं कि सहायक का पद केवल अपने पुत्रों के लिए बस बना हैं क्या या फ़िर अन्य लोग भी इस पद में पदस्थ होकर पद की गरिमा को बढ़ा सकते हैं। पर ये तो केवल सोच का नतीज़ा हैं कि गरीब तबके के विद्यार्थी कितने भी होशियार क्यूं ना रहें आएं लेकिन पैसों के आगे अधिकारी भी वही कार्य करेगा जो पैसा करवाएंगा। पुत्र को सहायक बनाने का मतलब यह है कि जब पिता उस पद से प्रथक हों जाएंगा तो पुत्र पद की गरिमा को संभालेगा ताकि काला - बाजारी का क्रम बढ़ता रहे।

*उचित मूल्य दुकान पिपरिया सहलावन में रहते हुए जमकर रहे चर्चा के पात्र*

पूर्व में पिपरिया सहलावन में रहते हुए राशन में जमकर काला - बाजारी की गई थीं। 66 कट्टी गेहूं को आहरित कर लिया गया था। फिर जब पता चला तो जमकर शिकायत हुई तो विक्रेता मुन्ना विश्वकर्मा भयभीत होते हुए तत्काल उच्च - अधिकारियों की क्रपा से सारे मामले को रफा - दफा कर दिया। पैसों में तो इतनी बड़ी ताकत हैं कि कुछ भी संभव है। जो कि बात इतनी आगे बढ़ गई थीं कि ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मिलकर बहुत उच्च अधिकारियों से तक शिक़ायत की थी लेकिन पैसों के आगे सब नतमस्तक हो गए।

*नौ हजार की नौकरी वाला बना लखपति*

नौ हजार मानदेय वाला आखिर लखपति कैसे बन गया यह बहुत सोचने वाली बात हैं लेकिन सहकारिता विभाग में पदस्थ रहे और लखपति ना बने ऐसा हों ही नहीं सकता पैसा तभी ज्यादा दिखने लगता हैं जब पैसा की आय ज्यादा हों। पूर्व में जो भी कार्य थे तो कागज़ी कार्य किए जाते थे कुछ दिन उपरांत जब भ्रष्टाचार बढ़ा तो शासन ने सारे कार्य ऑनलाइन कर दिए जब तक कार्य ऑनलाइन नहीं थे तो मुन्ना विश्वकर्मा ने कागजों में गोल माल करके गरीबों के राशन को आहरित करके लखपतियों की गिनती की शोभा बढ़ाने लगे। 

*मूंग थैलों में भी घोटाला*

जब विक्रेता मुन्ना विश्वकर्मा का पद लेखापाल का हैं तो लेख जोख का हिसाब एक दम सही होना चाहिए लेकिन जिनके ऊपर भी शासन कार्यवाही करती हैं तो मुन्ना विश्वकर्मा बुद्धि की चतुरता दिखाते हुए चाहे जिस दुकान से राशन निकालकर सेल्समैनों को दे दिया जाता हैं ताकि सेल्समैन कार्यवाही से बचा रहे क्यूंकि अगर सेल्समैन के ऊपर कार्यवाही हों गई तो अन्य सेल्समैनों के कार्यों से पर्दा उठेगा। जब मूंग की थैले आएं तो आधे थैंलो में गोल - माल कर दिया गया। अब लेखापाल विक्रेता हैं कुछ भी कर सकते हैं कोरोना काल में शासन से राज्य सरकार और केन्द्र सरकार से राशन आता था तो एक जगह का राशन बांटकर एक जगह का राशन आहरित कर लिया जाता था।

टिप्पणियाँ

popular post

नहर में बैठा यमराज छोटे - छोटे बच्चों को बना रहा शिकार, नहर ले रही बली नर्मदा नहर उमरियापान में डूबी बच्चियां, दो की मौत, अन्य की तलाश जारी

 नहर में बैठा यमराज छोटे - छोटे बच्चों को बना रहा शिकार, नहर ले रही बली नर्मदा नहर उमरियापान में डूबी बच्चियां, दो की मौत, अन्य की तलाश जारी ढीमरखेड़ा |  उमरियापान के समीप नर्मदा नहर में तीन बच्चियों के डूबने की दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना में दो बच्चियों की मौत हो चुकी है, जबकि तीसरी बच्ची की तलाश जारी है। यह हादसा रविवार की सुबह हुआ जब तीनों बच्चियां नहर में नहाने गई थीं। मृतक बच्चियों की पहचान सिद्धि पटेल (12 वर्ष, कक्षा आठवीं) एवं अंशिका पटेल (14 वर्ष, कक्षा नवमी) के रूप में हुई है, जबकि सिद्धि की छोटी बहन मानवी पटेल (8 वर्ष) अब भी लापता है। इस हृदयविदारक घटना के बाद गांव में मातम पसर गया है। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है, और प्रशासनिक अमला लगातार तीसरी बच्ची की तलाश में जुटा हुआ है।रविवार की सुबह परसवारा गांव की तीन बच्चियां उमरियापान के समीप नर्मदा नहर में नहाने के लिए गई थीं। नहर का पानी गहरा होने के कारण तीनों बच्चियां उसमें डूबने लगीं। आस-पास कोई मौजूद नहीं था, जिससे उन्हें तुरंत बचाया नहीं जा सका। कुछ देर बाद जब स्थानीय लोगों...

सिलौड़ी मंडल अध्यक्ष मनीष बागरी, दोस्ती की मिसाल, जिसने बचाई सौरभ मिश्रा की जान, मुंबई में आया सौरभ मिश्रा को अटैक अब हैं सुरक्षित, तुझे कैसे कुछ हों सकता हैं मेरे भाई तेरे ऊपर करोड़ो लोगो की दुआएं हैं काल भी उसका क्या बिगाड़े जिसकी रक्षा महाकाल करते हों

 सिलौड़ी मंडल अध्यक्ष मनीष बागरी, दोस्ती की मिसाल, जिसने बचाई सौरभ मिश्रा की जान, मुंबई में आया सौरभ मिश्रा को अटैक अब हैं सुरक्षित, तुझे कैसे कुछ हों सकता हैं मेरे भाई तेरे ऊपर करोड़ो लोगो की दुआएं हैं काल भी उसका क्या बिगाड़े जिसकी रक्षा महाकाल करते हों  ढीमरखेड़ा |  मुंबई जैसे बड़े महानगर में जीवन हमेशा व्यस्त और तेज़ गति से चलता है, लेकिन इसी बीच एक घटना घटी जिसने यह साबित कर दिया कि सच्ची दोस्ती किसी भी परिस्थिति में अपने दोस्त के लिए हर हद पार कर सकती है। सिलौड़ी मंडल अध्यक्ष मनीष बागरी ने अपने दोस्त सौरभ मिश्रा के लिए जो किया, वह न सिर्फ दोस्ती की मिसाल बन गया, बल्कि यह भी दिखाया कि इंसानियत और प्रेम से बड़ा कुछ भी नहीं। सौरभ मिश्रा मुंबई में थे, जब अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। बताया जाता है कि उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी जान पर खतरा बन गया था। जैसे ही यह खबर सिलौड़ी मंडल अध्यक्ष मनीष बागरी तक पहुंची, उन्होंने बिना किसी देरी के मुंबई जाने का फैसला किया। वह तुरंत हवाई जहाज से मुंबई रवाना हो गए, क्योंकि उनके लिए उनका दोस्त सबसे महत्वपूर...

पुलिस विभाग के बब्बर शेर, सहायक उप निरीक्षक अवध भूषण दुबे का गौरवशाली पुलिस जीवन, 31 मार्च को ढीमरखेड़ा थाने से होगे सेवानिवृत्त, सेवानिवृत्त की जानकारी सुनके आंखे हुई नम

 पुलिस विभाग के बब्बर शेर, सहायक उप निरीक्षक अवध भूषण दुबे का गौरवशाली पुलिस जीवन, 31 मार्च को ढीमरखेड़ा थाने से होगे सेवानिवृत्त,  सेवानिवृत्त की जानकारी सुनके आंखे हुई नम  ढीमरखेड़ा |   "सच्चे प्रहरी, अडिग संकल्प, निर्भीक कर्म" इन शब्दों को अगर किसी एक व्यक्ति पर लागू किया जाए, तो वह हैं अवध भूषण दुबे। अपराध की दुनिया में जिनका नाम सुनते ही अपराधियों के दिल कांप उठते थे, आम जनता जिन्हें एक रक्षक के रूप में देखती थी, और जिनकी उपस्थिति मात्र से ही लोग सुरक्षित महसूस करते थे ऐसे थे ढीमरखेड़ा थाने के सहायक उप निरीक्षक अवध भूषण दुबे। 01 मार्च 1982 को जब उन्होंने मध्य प्रदेश पुलिस की सेवा में कदम रखा था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह व्यक्ति आने वाले चार दशकों तक अपने साहस, कर्तव्यपरायणता और निडरता के लिए बब्बर शेर के नाम से जाना जाएगा। 43 वर्षों से अधिक की सेवा के बाद, 31 मार्च 2025 को वे ढीमरखेड़ा थाने से सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन उनके किए गए कार्य और उनकी यादें हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी। *अपराधियों के लिए काल "बब्बर शेर"* अपराध की दुनिया में कुछ प...