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पोड़ी कला बी केंद्र में गेहूं का अंबार, परिवहन न होने से किसान परेशान

 पोड़ी कला बी केंद्र में गेहूं का अंबार, परिवहन न होने से किसान परेशान कटनी  |  तहसील ढीमरखेड़ा के पोड़ी कला बी उपार्जन केंद्र में इन दिनों गेहूं की बंपर आवक तो हो रही है, लेकिन परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। केंद्र परिसर में गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है और समय पर उठाव नहीं होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। एक ओर सरकार किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी कर “अन्नदाता सम्मान” की बातें कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि खरीदी केंद्रों में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। पोड़ी कला बी केंद्र की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो व्यवस्था खुद ही अपने बोझ तले दब गई हो। केंद्र में जगह-जगह गेहूं की बोरियों के पहाड़ खड़े हैं, लेकिन परिवहन के लिए न पर्याप्त ट्रक उपलब्ध हैं और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है। किसानों का कहना है कि कई दिनों से उनका गेहूं केंद्र में रखा हुआ है, लेकिन उठाव न होने के कारण उन्हें बार-बार केंद्र के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। मौसम में हल्के बदलाव और आंधी-पानी की आशंका ने किसा...

कहीं भाजपा की सरकार को उठाना ना पड़ें इसका खामियाजा सरकार गिरने में नहीं लगेगी देर, अन्नदाता परेशान, कटनी में गोदामों का संकट, जबलपुर भेजा जा रहा गेहूं किसान हो रहे बेहाल कटनी का गेहूं जबलपुर में फेल, किसानों की मेहनत पर प्रशासनिक चोट, कहीं मिट्टी तो कहीं नमी का बहाना, कटनी के किसानों का गेहूं लगातार फेल, गोदाम नहीं, व्यवस्था नहीं ट्रकों में भरकर भटक रहा किसानों का गेहूं, कटनी के अन्नदाता परेशान, हर ट्रक में निकाली जा रही कमी, जबलपुर पहुंचते ही ‘फेल’ हो रहा कटनी का गेहूं, किसानों में भारी आक्रोश,कटनी का गेहूं जबलपुर रवाना, किसान बेहाल अन्नदाता लाइन में, व्यवस्था फाइल में

 कहीं भाजपा की सरकार को उठाना ना पड़ें इसका खामियाजा सरकार गिरने में नहीं लगेगी देर, अन्नदाता परेशान, कटनी में गोदामों का संकट, जबलपुर भेजा जा रहा गेहूं किसान हो रहे बेहाल कटनी का गेहूं जबलपुर में फेल, किसानों की मेहनत पर प्रशासनिक चोट, कहीं मिट्टी तो कहीं नमी का बहाना, कटनी के किसानों का गेहूं लगातार फेल, गोदाम नहीं, व्यवस्था नहीं ट्रकों में भरकर भटक रहा किसानों का गेहूं, कटनी के अन्नदाता परेशान, हर ट्रक में निकाली जा रही कमी, जबलपुर पहुंचते ही ‘फेल’ हो रहा कटनी का गेहूं, किसानों में भारी आक्रोश,कटनी का गेहूं जबलपुर रवाना, किसान बेहाल अन्नदाता लाइन में, व्यवस्था फाइल में कटनी  |  कटनी जिले में इस समय गेहूं खरीदी को लेकर जो हालात बने हुए हैं, उसने किसानों की मेहनत, उम्मीद और व्यवस्था तीनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेतों में पसीना बहाकर सुनहरा गेहूं उगाने वाले अन्नदाता आज खरीदी केंद्रों के बाहर धूल फांकने को मजबूर हैं। वजह सिर्फ एक कटनी जिले में पर्याप्त भंडारण व्यवस्था और गोदामों की कमी। आलम यह है कि जिले से गेहूं के ट्रक अब जबलपुर भेजे जा रहे हैं। किसान उम्मीद लेकर ट्रको...

मां वीरासन देवी धाम के सेवक पुजारी सौरभ दुबे आस्था, सेवा और सरलता का अद्भुत संगम

 मां वीरासन देवी धाम के सेवक पुजारी सौरभ दुबे आस्था, सेवा और सरलता का अद्भुत संगम कटनी  |  आस्था की धरती पर कुछ ऐसे चेहरे भी होते हैं जो केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहते, बल्कि लोगों के दुख-दर्द, भावनाओं और उम्मीदों को भी ईश्वर तक पहुंचाने का माध्यम बन जाते हैं।ऐसे ही सहज, सरल और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी हैं सौरभ दुबे, जिनका जन्मदिन श्रद्धा, सम्मान और शुभकामनाओं के साथ मनाया जाएगा। शक्तिपीठ मां वीरासन देवी मंदिर में सेवा दे रहे पुजारी सौरभ दुबे आज केवल एक पुजारी का नाम नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र बन चुके हैं। मां भगवती की भक्ति में समर्पित सौरभ दुबे का जीवन सादगी, सेवा और संस्कारों की ऐसी मिसाल है, जिसे देखकर हर कोई प्रभावित हो जाता है।मंदिर में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु यही कहता नजर आता है कि “माता के दरबार में अगर कोई हमारी बात सच्चे मन से पहुंचाता है, तो वह हैं सौरभ दुबे जी।” उनकी वाणी में मधुरता, व्यवहार में विनम्रता और सेवा में समर्पण स्पष्ट दिखाई देता है।आज के दौर में जहां लोग अपने स्वार्थ और व्यस्तताओं में उलझे हुए हैं, वहीं स...

अब आसमान से नहीं, ज़मीन पर दिखेगी हकीकत, मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज है, इस बार वजह हैं प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव, जिनका हेलीकॉप्टर अब सीधे जमीनी हकीकत की पड़ताल करने उतरने वाला है वो भी तहसील ढीमरखेड़ा के खरीदी केंद्रों पर

 अब आसमान से नहीं, ज़मीन पर दिखेगी हकीकत, मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज है, इस बार वजह हैं प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव, जिनका हेलीकॉप्टर अब सीधे जमीनी हकीकत की पड़ताल करने उतरने वाला है वो भी तहसील ढीमरखेड़ा के खरीदी केंद्रों पर कटनी  |  ढीमरखेड़ा के खरीदी केंद्रों में लंबे समय से चल रही अव्यवस्थाओं, किसानों की परेशानियों और कथित भ्रष्टाचार की खबरें आखिरकार सत्ता के शीर्ष तक पहुंच ही गईं। और अब, खुद मुख्यमंत्री का दौरा यह संकेत दे रहा है कि मामला केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हेलीकॉप्टर बहुत जल्द ढीमरखेड़ा की धरती पर उतर सकता है। इस दौरान कई खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण होगा जहां गेहूं खरीदी की प्रक्रिया, भुगतान व्यवस्था और किसानों के साथ हो रहे व्यवहार की सच्चाई परखी जाएगी।  *क्यों जरूरी हो गया यह दौरा* किसानों की लगातार शिकायतें समय पर तौल नहीं भुगतान में देरी दलालों की सक्रियता अधिकारियों की लापरवाही इन सबने सिस्टम की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं, सवाल यह है कि क्या यह दौरा केवल औपचारिकता रहेगा, ...

भ्रष्टाचार उस लेवल पर पहुंच चुका है कि बंदा रिश्वत लेकर भी अगर टाइम से काम कर दे तो उसे ईमानदारो की कैटेगरी में गिना जाता है, जब रिश्वत लेकर समय पर काम करना भी ‘ईमानदारी’ कहलाने लगे

 भ्रष्टाचार उस लेवल पर पहुंच चुका है कि बंदा रिश्वत लेकर भी अगर टाइम से काम कर दे तो उसे ईमानदारो की कैटेगरी में गिना जाता है, जब रिश्वत लेकर समय पर काम करना भी ‘ईमानदारी’ कहलाने लगे कटनी  |  देश की प्रशासनिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा धब्बा यदि किसी एक शब्द में समेटा जाए, तो वह है—भ्रष्टाचार। यह अब कोई छिपी हुई बीमारी नहीं, बल्कि खुलेआम स्वीकार कर ली गई व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है। हालत इतनी विकृत हो चुकी है कि यदि कोई अधिकारी रिश्वत लेने के बाद भी समय पर काम कर दे, तो उसे “ईमानदार” की श्रेणी में रख दिया जाता है। यह केवल एक कथन नहीं, बल्कि उस मानसिकता का आईना है जो हमारे तंत्र में गहराई तक जड़ें जमा चुकी है। एक समय था जब ईमानदारी का अर्थ था निष्पक्षता, पारदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा।लेकिन आज यह परिभाषा बदल चुकी है। अब ईमानदारी का पैमाना गिरकर इतना नीचे आ गया है कि रिश्वत लेना भी “सामान्य” और “व्यवहारिक” माना जाने लगा है। आम नागरिक यह मानकर चल रहा है कि बिना “चाय-पानी” के कोई काम नहीं होगा। यह स्वीकृति ही भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी ताकत है। सरकारी दफ्तरों की तस्वीर किसी से छिपी नह...

कटनी में भ्रष्टाचार के आरोप, क्या परिवहन विभाग पर उठते सवालों का जवाब मिलेगा,भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाना केवल नीतियों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी दिखना चाहिए कटनी का यह मामला एक परीक्षा है प्रशासन के लिए भी और राजनीतिक इच्छाशक्ति के लिए भी

 कटनी में भ्रष्टाचार के आरोप, क्या परिवहन विभाग पर उठते सवालों का जवाब मिलेगा,भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाना केवल नीतियों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी दिखना चाहिए कटनी का यह मामला एक परीक्षा है प्रशासन के लिए भी और राजनीतिक इच्छाशक्ति के लिए भी कटनी |  मध्यप्रदेश के कटनी जिले में परिवहन विभाग एक बार फिर गंभीर आरोपों के केंद्र में है। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) से जुड़े अधिकारी संतोष पाल पर लगे आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ रहा है। सबसे गंभीर आरोप आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े हैं।आर्थिक अपराध अन्वेषण संगठन (EOW) द्वारा आय से अधिक संपत्ति के मामले में प्रकरण दर्ज किया गया, जिसमें छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपये की संपत्ति उजागर होने की बात सामने आई। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने मामले को और गहरा कर दिया। ED के अनुसार लगभग ₹3.38 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई, जबकि वैध आय मात्र ₹73 लाख बताई गई है। कुल संपत्ति लगभग ₹4.80 करोड...

शिवराज पर एफआईआर की तैयारी, पूर्व IFS अधिकारी के आरोपों से मचा राजनीतिक हलचल

 शिवराज पर एफआईआर की तैयारी, पूर्व IFS अधिकारी के आरोपों से मचा राजनीतिक हलचल कटनी  |  मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मध्य प्रदेश कैडर के रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी आजाद सिंह डबास ने पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। डबास का आरोप है कि शिवराज सिंह चौहान ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान राजनीतिक लाभ और वोट बैंक को साधने के लिए राज्य की बहुमूल्य वन संपदा और नर्मदा नदी के पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2020 में सत्ता में वापसी के बाद बुधनी और नसरुल्लागंज क्षेत्र में करीब 1300 वन भूमि पट्टे अवैध रूप से बांटे गए। आरोपों के मुताबिक, ये पट्टे पात्र आदिवासी हितग्राहियों को देने के बजाय अपात्र लोगों को राजनीतिक दबाव में वितरित किए गए, जिससे वन क्षेत्र और पर्यावरण को गंभीर क्षति हुई।डबास ने इसे न केवल प्रशासनिक अनियमितता बल्कि पर्यावरणीय अपराध भी बताया है। इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने संबंधित एजेंसियों से शिकाय...