ढीमरखेड़ा में आईटीआई निर्माण का सपना फाइलों में कैद, भूमि चयन के अभाव में युवाओं का भविष्य दांव पर विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह के आश्वासनों के बाद भी ज़मीनी स्तर पर काम शून्य रोजगार के लिए पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं क्षेत्र के आदिवासी और ग्रामीण युवा, सब कुछ बड़वारा को ढीमरखेड़ा, उमरियापान, खमतरा, धरवारा और सिलौड़ी को केवल झुनझुना, ज्यादा समय अगर हो गया तो पैसा हो जायेगा लैप्स
ढीमरखेड़ा में आईटीआई निर्माण का सपना फाइलों में कैद, भूमि चयन के अभाव में युवाओं का भविष्य दांव पर विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह के आश्वासनों के बाद भी ज़मीनी स्तर पर काम शून्य रोजगार के लिए पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं क्षेत्र के आदिवासी और ग्रामीण युवा, सब कुछ बड़वारा को ढीमरखेड़ा, उमरियापान, खमतरा, धरवारा और सिलौड़ी को केवल झुनझुना, ज्यादा समय अगर हो गया तो पैसा हो जायेगा लैप्स ढीमरखेड़ा | मध्य प्रदेश के कटनी जिले के अंतर्गत आने वाला आदिवासी बाहुल्य और पिछड़ा क्षेत्र ढीमरखेड़ा आज एक बड़े विकास खंड के रूप में अपनी पहचान रखता है।लेकिन जब बात युवाओं के भविष्य, तकनीकी शिक्षा और रोजगार की आती है, तो यह क्षेत्र आज भी दशकों पीछे नज़र आता है। क्षेत्र के हजारों युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम करने के उद्देश्य से ढीमरखेड़ा मुख्यालय पर एक शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान खोलने की मांग लंबे समय से की जा रही है। विधानसभा चुनावों से लेकर हर छोटे-बड़े राजनैतिक मंचों से क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, विशेषकर वर्तमान विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह द्वारा युवाओं को बार-बार यह ...