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माता-पिता का त्याग कभी छोटा नहीं होता, लेकिन उसकी असली कीमत तभी चुकती है जब बच्चे अपने जीवन में कुछ बनकर दिखाते हैं, माता के गहने गिरवी, पिता के फटे कपड़े क्या बच्चों का भविष्य बदलेगा संघर्ष की यह कहानी

 माता-पिता का त्याग कभी छोटा नहीं होता, लेकिन उसकी असली कीमत तभी चुकती है जब बच्चे अपने जीवन में कुछ बनकर दिखाते हैं, माता के गहने गिरवी, पिता के फटे कपड़े क्या बच्चों का भविष्य बदलेगा संघर्ष की यह कहानी कटनी  |  आज के दौर में जब शिक्षा को सफलता की सबसे बड़ी सीढ़ी माना जाता है, तब समाज में ऐसे लाखों परिवार हैं जो अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए हर संभव त्याग करने को तैयार रहते हैं। कई माता-पिता अपने सपनों को त्याग कर बच्चों के भविष्य को संवारने में लग जाते हैं। एक ऐसी ही मार्मिक सच्चाई आज भी हमारे समाज में दिखाई देती है जहां एक मां ने बच्चों को पढ़ाने के लिए अपने गहने गिरवी रख दिए और पिता ने खुद फटे कपड़े पहनकर जिंदगी गुजार दी, ताकि बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी न आए। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की यह कहानी केवल एक घर की नहीं, बल्कि पूरे समाज की वास्तविकता है।गांवों और छोटे शहरों में ऐसे अनेक माता-पिता हैं जो अपनी जरूरतों को भूलकर बच्चों के भविष्य को संवारने में लगे हुए हैं। मां के गहने केवल आभूषण नहीं होते, बल्कि उसके आत्मसम्मान और जीवनभर की पूंजी होते हैं। लेकिन जब बात बच्च...

रपटा पेट्रोल पंप के सामने नदी किनारे अवैध प्लाटिंग कृषि भूमि को काटकर बेचे जा रहे प्लॉट, कार्रवाई की मांग

 रपटा पेट्रोल पंप के सामने नदी किनारे अवैध प्लाटिंग कृषि भूमि को काटकर बेचे जा रहे प्लॉट, कार्रवाई की मांग कटनी ।  शहर में अवैध प्लाटिंग का खेल एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। रपटा पेट्रोल पंप के ठीक सामने, साइन बोर्ड से अंदर जाने वाले मार्ग पर नदी से सटी कृषि भूमि में नियमों को दरकिनार कर प्लॉट काटे जाने का मामला सामने आया है।जानकारी के अनुसार खेती योग्य जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर खुलेआम बिक्री की जा रही है, जिससे क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों में कृषि प्रयोजन के लिए दर्ज है। इसके बावजूद बिना भू-उपयोग परिवर्तन (डायवर्जन) और कॉलोनी विकास की वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए प्लॉटिंग की जा रही है। मौके पर जमीन को समतल कर रास्ते निकाले जा रहे हैं और संभावित खरीदारों को आकर्षित करने के लिए अनौपचारिक रूप से सीमांकन भी किया जा रहा है। *नियमों की अनदेखी के आरोप* जानकारों का कहना है कि किसी भी कृषि भूमि को आवासीय उपयोग में बदलने के लिए पहले डायवर्जन की अनुमति लेना अनिवार्य होता है। साथ ही नगर नियोजन और स्थानीय निक...

झिन्ना पिपरिया में पंचायत भवन के पास बीएसएनएल का खुला गड्ढा, बड़ी दुर्घटना की आशंका

 झिन्ना पिपरिया में पंचायत भवन के पास बीएसएनएल का खुला गड्ढा, बड़ी दुर्घटना की आशंका कटनी । ग्राम झिन्ना पिपरिया में पंचायत भवन के बाजू में खुदा हुआ बीएसएनएल का गड्ढा ग्रामीणों के लिए खतरा बनता जा रहा है। बताया जा रहा है कि लगभग एक माह पहले बीएसएनएल के कार्य के लिए यह गड्ढा खोदा गया था, लेकिन आज तक उसे न तो भरा गया और न ही किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था की गई है।ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन के पास होने के कारण यहां दिनभर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। इसके बावजूद गड्ढे के आसपास न तो बैरिकेडिंग की गई है और न ही किसी प्रकार का चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। ऐसे में किसी भी समय बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है।स्थानीय लोगों के अनुसार अंधेरे के समय यह गड्ढा और भी खतरनाक साबित हो सकता है।खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह बड़ा खतरा बन गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन और बीएसएनएल विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द इस गड्ढे को भरवाया जाए या इसके चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था की जाए, ताकि किसी भी संभावित हादसे को रोका जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रह...

कई थाने के मिनी थाना प्रभारी के ऊपर भी गिरने वाली हैं गाज, रिश्वत लेते आरक्षक रंगे हाथ पकड़ा गया

 कई थाने के मिनी थाना प्रभारी के ऊपर भी गिरने वाली हैं गाज, रिश्वत लेते आरक्षक रंगे हाथ पकड़ा गया  कटनी |  इंदौर लोकायुक्त टीम ने अंजड़ थाने में पदस्थ उपनिरीक्षक महावीर सिंह चंदेल और आरक्षक पवन प्रजापति के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि दोनों ने एक ज्वेलर्स संचालक को पुराने आत्महत्या मामले में फंसाने की धमकी देकर 50 हजार रुपए रिश्वत मांगी थी। शिकायत के सत्यापन के दौरान लोकायुक्त टीम ने आरक्षक पवन प्रजापति को 15 हजार रुपए की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 और बीएनएस 2023 की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है।

रीठी में 'बुलडोजर' सुस्त, माफिया मस्त, कलेक्टर के आदेशों को ठेंगा दिखा रहा राजस्व अमला

 रीठी में 'बुलडोजर' सुस्त, माफिया मस्त, कलेक्टर के आदेशों को ठेंगा दिखा रहा राजस्व अमला कटनी | मध्य प्रदेश सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' के दावों की कटनी जिले की रीठी तहसील में धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि अवैध कॉलोनाइजर्स पर बुलडोजर चलना चाहिए, वहीं रीठी में प्रशासनिक संरक्षण के बीच अवैध प्लॉटिंग का 'मायाजाल' तेजी से फैल रहा है। *प्रमुख बिंदु: नियमों की बलि चढ़ती रीठी की जमीन* * *बिना डायवर्सन का खेल*: कृषि भूमि पर बिना किसी लैंड यूज परिवर्तन (Diversion) या रेरा (RERA) रजिस्ट्रेशन के सड़कों का जाल बिछा दिया गया है। * *संवेदनशील क्षेत्रों पर कब्जा:* स्कूल के ठीक सामने जहाँ बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है, वहां नियमों को ताक पर रखकर अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं। * *कागजी जवाबदेही*: शासन ने स्पष्ट किया है कि नई अवैध कॉलोनी बनने पर कलेक्टर की जवाबदेही होगी, लेकिन रीठी में यह आदेश केवल फाइलों तक सीमित नजर आ रहा है। *राजस्व अमले की 'मौन सहमति' या मिलीभगत?* क्षेत्र में चर्चा है कि बिना स्थानीय पटवारी, आरआई और तहसीलदार की जानकारी क...

खरी अखरी सवाल उठाते हैं पालकी नहीं स्वाभिमान सदैव तानाशाही से लड़ा है जब भी मरा है गर्व से मरा है

 खरी अखरी सवाल उठाते हैं पालकी नहीं स्वाभिमान सदैव तानाशाही से लड़ा है जब भी मरा है गर्व से मरा है क्या युद्ध की डोर ईरान के हाथ में है ? क्योंकि पूरी दुनिया की इकाॅनामी पर असर होमर्ज रूट से पड़ रहा है और होमर्ज रूट पर कब्जा ईरान का है। मिडिल ईस्ट के भीतर अमेरिकी बेस, जो सैकड़ा भर से ज्यादा हैं उनमें से अधिकतर बेस, को ईरान ने ध्वस्त कर दिया है। वेस्ट एशिया के भीतर काम कर रहे अमेरिकी कंसुलेट और एंबेस पूरी तरह से डिस्टर्ब हैं। अमेरिका अपने लोगों को सुरक्षित निकालने के अलावा ऐसा कोई भी कदम उठाने की स्थिति में नहीं आ पा रहा है जिससे लगे कि वह ईरान के भीतर रिजम चेंज करने की दिशा में कदम उठा रहा है। क्या युद्ध को लेकर वाकई ऐसी परिस्थिति आ गई है जहां ईरान के भीतर से आर्डर बहुत साफ है - इस युद्ध का मकसद ईरान, इस्लाम, खामनेई की विचारधारा, इस्लामिक देशों को साथ खड़ा करने की सोच, वेस्ट एशिया में इजराइल मौजूदगी यानी मौजूदगी के खिलाफ और अपने साथ खड़े देशों को एक स्वायत्त परिस्थिति देने की सोच। ईरान ने अगर युद्ध को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अपने देश को तैयार कर लिया है तो मैसेज ना केवल अमेरिका और...

रोटी की मजबूरी और बिकती इंसानियत मजदूरों की पीड़ा पर समाज की खामोशी, रोटी के लिए इस दुनिया में मजदूरों के तन बिक जाते हैं, मजदूरों के तन का जिक्र ही क्या, मुर्दों के कफ़न बिक जाते हैं

 रोटी की मजबूरी और बिकती इंसानियत मजदूरों की पीड़ा पर समाज की खामोशी, रोटी के लिए इस दुनिया में मजदूरों के तन बिक जाते हैं, मजदूरों के तन का जिक्र ही क्या, मुर्दों के कफ़न बिक जाते हैं कटनी  |   आज भी दुनिया के कई हिस्सों में मजदूर वर्ग अपनी मेहनत, पसीने और कभी - कभी अपनी गरिमा तक को बेचने के लिए मजबूर है। पेट की आग इतनी बड़ी होती है कि वह इंसान को हर तरह की कठिनाई और अपमान सहने पर मजबूर कर देती है। भारत जैसे विकासशील देश में मजदूरों का जीवन संघर्षों से भरा हुआ है।शहरों की चमक-दमक, ऊंची इमारतें, सड़कें, पुल और कारखाने जिन हाथों की मेहनत से खड़े होते हैं, वही हाथ अक्सर दो वक्त की रोटी के लिए तरसते नजर आते हैं। विडंबना यह है कि जो लोग देश के विकास की नींव रखते हैं, वही लोग सबसे अधिक असुरक्षित और उपेक्षित जीवन जीते हैं।मजदूरों की सबसे बड़ी समस्या अस्थिर रोजगार और कम मजदूरी है। दिहाड़ी मजदूर सुबह काम की तलाश में घर से निकलते हैं, लेकिन यह तय नहीं होता कि शाम को उनके हाथ में मजदूरी आएगी या नहीं। कई बार उन्हें पूरे दिन की मेहनत के बाद भी उचित भुगतान नहीं मिलता। ठेकेदारी व्...