माता-पिता का त्याग कभी छोटा नहीं होता, लेकिन उसकी असली कीमत तभी चुकती है जब बच्चे अपने जीवन में कुछ बनकर दिखाते हैं, माता के गहने गिरवी, पिता के फटे कपड़े क्या बच्चों का भविष्य बदलेगा संघर्ष की यह कहानी
माता-पिता का त्याग कभी छोटा नहीं होता, लेकिन उसकी असली कीमत तभी चुकती है जब बच्चे अपने जीवन में कुछ बनकर दिखाते हैं, माता के गहने गिरवी, पिता के फटे कपड़े क्या बच्चों का भविष्य बदलेगा संघर्ष की यह कहानी कटनी | आज के दौर में जब शिक्षा को सफलता की सबसे बड़ी सीढ़ी माना जाता है, तब समाज में ऐसे लाखों परिवार हैं जो अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए हर संभव त्याग करने को तैयार रहते हैं। कई माता-पिता अपने सपनों को त्याग कर बच्चों के भविष्य को संवारने में लग जाते हैं। एक ऐसी ही मार्मिक सच्चाई आज भी हमारे समाज में दिखाई देती है जहां एक मां ने बच्चों को पढ़ाने के लिए अपने गहने गिरवी रख दिए और पिता ने खुद फटे कपड़े पहनकर जिंदगी गुजार दी, ताकि बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी न आए। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की यह कहानी केवल एक घर की नहीं, बल्कि पूरे समाज की वास्तविकता है।गांवों और छोटे शहरों में ऐसे अनेक माता-पिता हैं जो अपनी जरूरतों को भूलकर बच्चों के भविष्य को संवारने में लगे हुए हैं। मां के गहने केवल आभूषण नहीं होते, बल्कि उसके आत्मसम्मान और जीवनभर की पूंजी होते हैं। लेकिन जब बात बच्च...