दिवाली पर मिठाई भी बताती है समाज में किसकी कितनी हैसियत, इंसान से ज्यादा ओहदे और पैसे की कीमत! हैसियत के हिसाब से बदल जाता है मिठाई का स्वाद सम्मान और व्यवहार समाज की कड़वी सच्चाई पर उठे सवाल
दिवाली पर मिठाई भी बताती है समाज में किसकी कितनी हैसियत, इंसान से ज्यादा ओहदे और पैसे की कीमत! हैसियत के हिसाब से बदल जाता है मिठाई का स्वाद सम्मान और व्यवहार समाज की कड़वी सच्चाई पर उठे सवाल कटनी | दिवाली खुशियों, प्रेम, भाईचारे और आपसी सम्मान का त्यौहार है, लेकिन इसी त्यौहार पर समाज की एक कड़वी तस्वीर भी देखने को मिलती है। अक्सर लोग सस्ती मिठाई उन्हें देते हैं, जो उनके सामने सलाम करते हैं, जबकि महंगी मिठाई और विशेष उपहार उन लोगों के लिए रखे जाते हैं, जिन्हें वे स्वयं सलाम करते हैं। आखिर ऐसा क्यों? क्या इंसान की पहचान उसकी अच्छाई, व्यवहार और व्यक्तित्व से नहीं, बल्कि उसके पद, प्रतिष्ठा और आर्थिक हैसियत से होने लगी है? आज समाज में कई बार सम्मान रिश्तों की गहराई से नहीं, बल्कि जेब की मोटाई और कुर्सी की ऊंचाई से तय होता दिखाई देता है। जिसके पास बड़ा पद और पैसा है, उसके दरवाजे पर लोगों की भीड़ रहती है, वहीं एक साधारण व्यक्ति की अच्छाइयों और भावनाओं को भी अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या मिठाई की कीमत से इंसान की कीमत तय होनी चाहिए? क्या...