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संदेश

प्रधानमंत्री के संदेश का असर, बस में सफर कर बड़वारा विधायक ने दिया बड़ा संदेश आम जनता से पूछा हाल - चाल आम जनता के दिलों में राज करता है विधायक का स्वभाव

 प्रधानमंत्री के संदेश का असर, बस में सफर कर बड़वारा विधायक ने दिया बड़ा संदेश आम जनता से पूछा हाल - चाल आम जनता के दिलों में राज करता है विधायक का स्वभाव  कटनी | देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए संयम और बचत के आह्वान का असर अब जनप्रतिनिधियों में भी दिखाई देने लगा है। कटनी जिले के बड़वारा विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और ईंधन बचत का संदेश देने के लिए बस में सफर कर एक नई मिसाल पेश की।विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह आम यात्रियों के साथ बस में बैठकर बड़वारा से कटनी पहुंचे।सफर के दौरान यात्रियों ने विधायक से खुलकर चर्चा की और उनकी सादगी की जमकर सराहना की। आम लोगों के बीच बिना किसी तामझाम के यात्रा करते विधायक को देखकर यात्री भी आश्चर्यचकित नजर आए। कई यात्रियों ने विधायक के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और उनके इस कदम को जनता से जुड़ाव की पहचान बताया। आमतौर पर नेताओं की पहचान लंबे काफिलों और महंगी गाड़ियों से जुड़ी रहती है, लेकिन विधायक का यह कदम जिले में चर्चा का विषय बन गया ...

टोला खरीदी केंद्र में परिवहन व्यवस्था चरमराई, किसान और खरीदी प्रभारी दोनों परेशान

 टोला खरीदी केंद्र में परिवहन व्यवस्था चरमराई, किसान और खरीदी प्रभारी दोनों परेशान कटनी | तहसील ढीमरखेड़ा के टोला खरीदी केंद्र में इन दिनों गेहूं परिवहन की गंभीर समस्या ने किसानों और खरीदी केंद्र के कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खरीदी तो लगातार जारी है, लेकिन परिवहन व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ाने से केंद्र में गेहूं का अंबार लग गया है। हालत यह हो गई है कि खरीदी प्रभारी मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रहा है, वहीं किसान भी अपनी उपज के समय पर परिवहन और भुगतान को लेकर भारी तनाव में हैं। सूत्रों के अनुसार खरीदी केंद्र में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में गेहूं पहुंच रहा है, लेकिन ट्रकों और परिवहन साधनों की कमी के चलते उठाव नहीं हो पा रहा।केंद्र परिसर में बोरी के ऊपर बोरी जमा होती जा रही है।बारिश और मौसम खराब होने की आशंका के बीच किसानों को अपनी मेहनत की फसल खराब होने का डर सता रहा है।खरीदी प्रभारी का कहना है कि ऊपर से लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि खरीदी कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए, जबकि दूसरी ओर परिवहन व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। एक तरफ किसानों की नाराजगी झेलनी पड़ र...

स्लॉट बुकिंग की समस्या से किसान परेशान, पोर्टल की खराब व्यवस्था बनी चिंता का विषय

 स्लॉट बुकिंग की समस्या से किसान परेशान, पोर्टल की खराब व्यवस्था बनी चिंता का विषय कटनी  |  ढीमरखेड़ा में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के दौरान स्लॉट बुकिंग की समस्या किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। पोर्टल की तकनीकी खामियों और लगातार सर्वर डाउन रहने से किसान घंटों तक परेशान हो रहे हैं। कई किसानों का आरोप है कि स्लॉट बुकिंग समय पर नहीं हो पा रही, जिसके कारण उन्हें खरीदी केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले किसानों का कहना है कि पोर्टल कभी खुलता नहीं, तो कभी ओटीपी की समस्या सामने आ जाती है। कई बार स्लॉट बुक होने के बाद भी जानकारी अपडेट नहीं होती, जिससे किसानों को वापस लौटना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि तकनीकी अव्यवस्था का खामियाजा सीधे उन्हें भुगतना पड़ रहा है। खरीदी केंद्रों पर बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी नजर आ रही हैं। किसान कई दिनों से अपनी उपज लेकर इंतजार कर रहे हैं, लेकिन स्लॉट नहीं मिलने के कारण खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।इससे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर स्लॉट बुकि...

ढीमरखेड़ा के दूरस्थ आधा दर्जन से अधिक गांव पहुंचकर जिला पंचायत सीईओ ने निर्माण एवं विकास कार्यों की नब्ज़ टटोलेते हुए परखी गुणवत्ता, सुश्री कौर ने अच्छे साइट सिलेक्शन की सराहना कर पीठ थपथपाई तो कहीं नाराजगी भी जताई, निर्धारित समयावधि में कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराने अधिकारियों को दिए निर्देश

 ढीमरखेड़ा के दूरस्थ आधा दर्जन से अधिक गांव पहुंचकर जिला पंचायत सीईओ ने निर्माण एवं विकास कार्यों की नब्ज़ टटोलेते हुए परखी गुणवत्ता, सुश्री कौर ने अच्छे साइट सिलेक्शन की सराहना कर पीठ थपथपाई तो कहीं नाराजगी भी जताई, निर्धारित समयावधि में कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराने अधिकारियों को दिए निर्देश कटनी | भीषण गर्मी, तपती दोपहरी का वक्त,सकरी मेढ़ें, कटीली झाड़ियों और खेतों के बीच पगडंडी मार्ग से ऊबड़ खाबड़ पथरीली राहों में पसीने से तरबतर जिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर ने ढाई से तीन किलोमीटर पैदल चलकर विकासखंड ढीमरखेड़ा के दूरस्थ आधा दर्जन से अधिक गांवों में निर्माण एवं विकास कार्यों की नब्ज़ टटोली। इस दौरान उन्होंने ढीमरखेड़ा, कोठी, झिन्ना पिपरिया, भमका, खमतरा पहरुआ एवं अन्य गांव पहुंचकर, नवीन स्वीकृत जनपद पंचायत भवन निर्माण कार्य स्थल,गेहूं खरीदी केंद्र, जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत खेत तालाब, डगवेल, आंगनवाड़ी भवन एवं शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में लैब एवं अतिरिक्त कक्ष निर्माणाधीन कार्यों की गुणवत्ता को परखा और प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने ढीमरखेड़ा म...

विवेचना व्यवस्था, न्याय की रीढ़ या भ्रष्ट तंत्र का हथियार

 विवेचना व्यवस्था, न्याय की रीढ़ या भ्रष्ट तंत्र का हथियार कटनी  |  किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की न्याय व्यवस्था केवल अदालतों की चारदीवारी तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसकी वास्तविक ताकत उस विवेचना व्यवस्था में छिपी होती है जो अपराध के पीछे का सच सामने लाने का काम करती है।अदालत वही निर्णय देती है जो तथ्य और सबूत उसके सामने प्रस्तुत किए जाते हैं। यदि विवेचना निष्पक्ष, ईमानदार और सत्य आधारित हो तो न्याय व्यवस्था मजबूत होती है, लेकिन यदि जांच भ्रष्टाचार, दबाव और चापलूसी की भेंट चढ़ जाए तो न्याय केवल कागजों तक सीमित रह जाता है। आज देश में आम जनता के बीच यह धारणा तेजी से मजबूत हुई है कि कई मामलों में विवेचना सत्य की खोज के लिए नहीं, बल्कि प्रभावशाली लोगों को बचाने और कमजोर वर्ग को दबाने के लिए की जाती है। पैसों के बल पर जांच की दिशा बदल देना, राजनीतिक दबाव में केस कमजोर करना, सबूत गायब करना और अपराधियों को बचाने के लिए कागजों में कहानी बदल देना यह सब न्याय व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब विवेचक सत्ता के सामने झुकने लगे और सत्य की जगह जी-हजूरी को प्राथमिकता देने लगे, ...

विवेचना व्यवस्था, न्याय की रीढ़ या भ्रष्ट तंत्र का हथियार

 विवेचना व्यवस्था, न्याय की रीढ़ या भ्रष्ट तंत्र का हथियार कटनी  |  किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की न्याय व्यवस्था केवल अदालतों की चारदीवारी तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसकी वास्तविक ताकत उस विवेचना व्यवस्था में छिपी होती है जो अपराध के पीछे का सच सामने लाने का काम करती है।अदालत वही निर्णय देती है जो तथ्य और सबूत उसके सामने प्रस्तुत किए जाते हैं। यदि विवेचना निष्पक्ष, ईमानदार और सत्य आधारित हो तो न्याय व्यवस्था मजबूत होती है, लेकिन यदि जांच भ्रष्टाचार, दबाव और चापलूसी की भेंट चढ़ जाए तो न्याय केवल कागजों तक सीमित रह जाता है। आज देश में आम जनता के बीच यह धारणा तेजी से मजबूत हुई है कि कई मामलों में विवेचना सत्य की खोज के लिए नहीं, बल्कि प्रभावशाली लोगों को बचाने और कमजोर वर्ग को दबाने के लिए की जाती है। पैसों के बल पर जांच की दिशा बदल देना, राजनीतिक दबाव में केस कमजोर करना, सबूत गायब करना और अपराधियों को बचाने के लिए कागजों में कहानी बदल देना यह सब न्याय व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब विवेचक सत्ता के सामने झुकने लगे और सत्य की जगह जी-हजूरी को प्राथमिकता देने लगे, ...

आखिर कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पीयूष शुक्ला की संपत्ति की जांच कब

 आखिर कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पीयूष शुक्ला की संपत्ति की जांच कब कटनी  |  सरकारी कुर्सी जनता की सेवा के लिए होती है, लेकिन जब वही कुर्सी सवालों के घेरे में आ जाए तो फिर जांच की मांग उठना स्वाभाविक है। इन दिनों क्षेत्र में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पीयूष शुक्ला की संपत्ति को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। आमजन के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर नौकरी में आने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति क्या थी और अब कितनी संपत्ति अर्जित हो चुकी है? यदि सब कुछ नियम और कानून के दायरे में है तो फिर पारदर्शिता से जांच कराने में हिचक कैसी? जनता का कहना है कि शासन की योजनाओं का लाभ गरीबों तक पहुंचाने वाले विभाग में बैठे अधिकारियों की जीवनशैली और बढ़ती संपत्ति पर समय-समय पर निगरानी होना बेहद जरूरी है। राशन व्यवस्था, खाद्यान्न वितरण और सार्वजनिक आपूर्ति प्रणाली सीधे गरीब और मध्यम वर्ग के जीवन से जुड़ी होती है। ऐसे में यदि किसी अधिकारी की संपत्ति अचानक चर्चा का विषय बन जाए तो सवाल उठना लाजिमी है। क्षेत्र में लोग खुलकर कह रहे हैं कि नौकरी से पहले आखिर पीयूष शुक्ला के पास कितनी जमीन, मकान, वाहन और बै...