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समय की अदालत में सब बराबर, मिट्टी का हिसाब होगा तो मालिक भी किरायेदार निकलेंगे

 समय की अदालत में सब बराबर, मिट्टी का हिसाब होगा तो मालिक भी किरायेदार निकलेंगे कटनी |  इंसानी सभ्यता का इतिहास अगर उठाकर देखा जाए, तो यह मूल रूप से दो चीज़ों के इर्द-गिर्द घूमता है ज़मीन और ज़मीर। इतिहास गवाह है कि साम्राज्यों के उदय और पतन की मुख्य वजह ज़मीन के एक टुकड़े पर अपना एकाधिकार ज़ाहिर करना रही है। लेकिन इस भागदौड़, युद्धों, और कागज़ी दस्तावेज़ों के बीच इंसान एक बुनियादी सत्य भूल जाता है कि जिस ज़मीन को वह अपनी जागीर समझ रहा है, वह असल में महज़ एक पड़ाव है। एक पुरानी और बेहद मशहूर दार्शनिक पंक्ति है: "जिस दिन मिट्टी से हिसाब होगा, ज़मीन के मालिक भी किरायेदार निकलेंगे।" यह पंक्ति महज़ कुछ शब्दों का मेल नहीं है, बल्कि यह मानव अस्तित्व, उसके अहंकार और प्रकृति के अंतिम न्याय पर एक ऐसा तीखा कटाक्ष है, जो हर दौर में प्रासंगिक रहता है। *अहंकार का दस्तावेज़ और प्रकृति का कानून* आधुनिक समाज में किसी व्यक्ति की सफलता का पैमाना इस बात से तय होता है कि उसके पास कितनी अचल संपत्ति है। दिल्ली, मुंबई, न्यूयॉर्क या लंदन जैसे महानगरों में ज़मीन के एक छोटे से टुकड़े की कीमत करोड़ों-अ...

कलम से दूर युवा, जर्जर स्कूल और चुनावी रैलियों का शोर अधर में लटका भावी पीढ़ी का भविष्य, झंडों के साए में सिसकता बचपन शिक्षा की बदहाली और राजनीतिक मोहरे बनते युवा, रैलियों पर करोड़ों और स्कूलों में लाचारी क्या यही है हमारे देश का उज्ज्वल कल, कलम से दूर युवा और गिरती शिक्षा, चुनावी रैलियों के शोर में गुम होता भावी पीढ़ी का भविष्य

 कलम से दूर युवा, जर्जर स्कूल और चुनावी रैलियों का शोर अधर में लटका भावी पीढ़ी का भविष्य, झंडों के साए में सिसकता बचपन शिक्षा की बदहाली और राजनीतिक मोहरे बनते युवा, रैलियों पर करोड़ों और स्कूलों में लाचारी क्या यही है हमारे देश का उज्ज्वल कल, कलम से दूर युवा और गिरती शिक्षा, चुनावी रैलियों के शोर में गुम होता भावी पीढ़ी का भविष्य भोपाल | आज के दौर में देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने और सामाजिक संरचना पर गौर करें, तो एक चिंताजनक तस्वीर उभरकर सामने आती है। जहाँ युवाओं के हाथों में बेहतर भविष्य गढ़ने के लिए कलम और किताबें होनी चाहिए थीं, वहीं उन्हें राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए रैलियों और चुनावी अभियानों में झंडे थमाए जा रहे हैं। शिक्षा, भाईचारे और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बीच राजनीति का यह स्वरूप समाज और बच्चों के भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।  "कलम की जगह हाथ में चुनावी झंडे थमाए जा रहे हैं..."  के आलोक में यह विशेष रिपोर्ट शिक्षा व्यवस्था के गिरते स्तर, राजनीति के बाहुबल और समाज में फैलते ध्रुवीकरण पर एक विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है। ...

*चमत्कारों की जीवंत स्थली ढीमरखेड़ा बस स्टैंड स्थित बड़ी माता मंदिर, जहाँ आज भी गूँजती है आदिशक्ति के घुँघरुओं की झंकार* *शर्मा परिवार की पीढ़ियों से चली आ रही सेवा-पूजा, नवरात्रि में जवारे और महाआरती का विशेष आयोजन मंदिर से जुड़ी चमत्कारों की जनश्रुतियाँ आज भी क्षेत्र में चर्चित, जो नागपुर से हुए ईलाज के दौरान वापस डॉक्टरों ने कर दिया मना उसको भगवती ने किया ठीक*

 *चमत्कारों की जीवंत स्थली ढीमरखेड़ा बस स्टैंड स्थित बड़ी माता मंदिर, जहाँ आज भी गूँजती है आदिशक्ति के घुँघरुओं की झंकार* *शर्मा परिवार की पीढ़ियों से चली आ रही सेवा-पूजा, नवरात्रि में जवारे और महाआरती का विशेष आयोजन मंदिर से जुड़ी चमत्कारों की जनश्रुतियाँ आज भी क्षेत्र में चर्चित, जो नागपुर से हुए ईलाज के दौरान वापस डॉक्टरों ने कर दिया मना उसको भगवती ने किया ठीक* ढीमरखेड़ा | आधुनिकता की चकाचौंध और वैज्ञानिक तर्कों से परे, भारत की पावन धरा पर आज भी कुछ ऐसे स्थान मौजूद हैं, जहाँ दैवीय शक्तियों का अहसास साक्षात महसूस किया जा सकता है। ऐसा ही एक परम पवित्र और अलौकिक आस्था का केंद्र है मध्य प्रदेश के कटनी जिले के ढीमरखेड़ा बस स्टैंड पर स्थित बड़ी माता मंदिर। सैकड़ों वर्ष पुराना यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र के लाखों श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास, अगाध श्रद्धा और सदियों से चली आ रही जीवंत परंपराओं का एक महासमुद्र है। मढ़िया से लेकर एक गगनचुंबी भव्य मंदिर बनने तक का इसका सफर और निर्माण कार्य के दौरान घटे अलौकिक चमत्कार, आज भी लोगों को दाँतों तले उँगली दबाने पर मजबूर कर दे...

आपकी गैरमौजूदगी में भी चले काम, तभी समझिए सिस्टम हुआ तैयार 8 घंटे की मेहनत, 16 घंटे का संघर्ष और दूसरों के हुनर को जोड़ने की कला जानिए कैसे बदलती है कर्मचारी से उद्यमी बनने की सोच, वक्त बेचने से नहीं, 'सिस्टम' बनाने से खड़ा होता है साम्राज्य आधुनिक कॉर्पोरेट जगत में माइंडसेट का नया बदलाव, हम भीड़ में चलने वाले नहीं, अपनी राह बनाते हैं, हम वक्त नहीं बेचते जनाब, वक्त से आगे निकल जाते हैं कोई दिन-रात मेहनत करके अपनी पहचान बनाता है,कोई हुनरमंद लोगों को जोड़कर पूरा कारोबार चलाता है

 आपकी गैरमौजूदगी में भी चले काम, तभी समझिए सिस्टम हुआ तैयार 8 घंटे की मेहनत, 16 घंटे का संघर्ष और दूसरों के हुनर को जोड़ने की कला जानिए कैसे बदलती है कर्मचारी से उद्यमी बनने की सोच, वक्त बेचने से नहीं, 'सिस्टम' बनाने से खड़ा होता है साम्राज्य आधुनिक कॉर्पोरेट जगत में माइंडसेट का नया बदलाव, हम भीड़ में चलने वाले नहीं, अपनी राह बनाते हैं, हम वक्त नहीं बेचते जनाब, वक्त से आगे निकल जाते हैं कोई दिन-रात मेहनत करके अपनी पहचान बनाता है,कोई हुनरमंद लोगों को जोड़कर पूरा कारोबार चलाता है कटनी |  आज के 21वीं सदी के बदलते आर्थिक परिदृश्य में सफलता की परिभाषा पूरी तरह बदल चुकी है। एक दौर था जब काम के घंटों को ही तरक्की और उत्पादकता का एकमात्र पैमाना माना जाता था। लेकिन आज का आधुनिक कॉर्पोरेट और स्टार्टअप इकोसिस्टम एक अलग ही सच्चाई बयां कर रहा है। हाल ही में वैश्विक विचारकों और आर्थिक विश्लेषकों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है कि क्या केवल कड़ी मेहनत किसी व्यक्ति को कामयाबी के शिखर पर पहुंचा सकती है, या फिर खेल पूरी तरह से 'हुनर और सोच' का है? विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग केवल अपने ह...

मध्य प्रदेश की सियासत में बड़ा उबाल बुधनी के कोसमी गांव की कार्रवाई पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान आमने-सामने

 मध्य प्रदेश की सियासत में बड़ा उबाल बुधनी के कोसमी गांव की कार्रवाई पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान आमने-सामने भोपाल |  मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर भारी उथल-पुथल मची हुई है। सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान एक बेहद संवेदनशील प्रशासनिक और सामाजिक मुद्दे पर सीधे आमने-सामने आ गए हैं। सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम कोसमी में आदिवासी परिवारों के खिलाफ हुई प्रशासनिक कार्रवाई ने इस विवाद को जन्म दिया है, जिसने अब एक बड़े राजनीतिक गतिरोध का रूप ले लिया है। विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर चल रहे कथित अंतर्कलह और सत्ता संघर्ष के तौर पर पेश कर रहा है, वहीं मुख्यमंत्री ने स्थिति को संभालते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। *विवाद का मुख्य केंद्र कोसमी गांव की बुलडोजर कार्रवाई* इस पूरे राजनीतिक घमासान की शुरुआत सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोसमी से हुई। रविवार को यहां वन विकास निगम और स्थानीय प्रशासन क...

पोड़ी कला बी में 18 तारीख को होगी माता रानी की भव्य महाआरती, 56 भोग का लगेगा प्रसाद

 पोड़ी कला बी में 18 तारीख को होगी माता रानी की भव्य महाआरती, 56 भोग का लगेगा प्रसाद ढीमरखेड़ा | ग्राम पोड़ी कला बी में दिनांक 18 को माता रानी की भव्य महाआरती एवं 56 भोग प्रसाद का आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। माता रानी को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए जाएंगे। महाआरती का भव्य और दिव्य दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। मां भगवती की आराधना, जयकारों और भक्तिमय वातावरण से पूरा क्षेत्र भक्तिरस में सराबोर होगा। आयोजन के दौरान श्रद्धालु माता रानी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। माता रानी की महाआरती और 56 भोग का यह दिव्य आयोजन देखने योग्य होगा। समस्त श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में शामिल होकर पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की गई है।

पोड़ी कला बी में पांच स्थानों पर विराजीं माता रानी, भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ पूरा गांव

 पोड़ी कला बी में पांच स्थानों पर विराजीं माता रानी, भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ पूरा गांव ढीमरखेड़ा | नवरात्रि के पावन अवसर पर ग्राम पोड़ी कला बी में चारों ओर भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिल रहा है। गांव में पांच अलग-अलग स्थानों पर माता रानी की प्रतिमाएं विराजमान की गई हैं, जहां श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ माता की आराधना में जुटे हुए हैं। सुबह से लेकर देर रात तक पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और माता के जयकारों से पूरा गांव भक्तिमय बना हुआ है। गांव के विभिन्न पंडालों में आकर्षक सजावट की गई है। माता रानी के दर्शन के लिए ग्रामीणों के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। महिलाएं, पुरुष और बच्चे भक्ति कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। शाम होते ही पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगती है और भजनों की मधुर धुन से वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंग जाता है। *पांच स्थानों पर माता के दरबार, श्रद्धालुओं में उत्साह* पोड़ी कला बी में पांच स्थानों पर माता रानी की स्थापना ग्रामीणों की धार्मिक आस्था और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक बनी हुई है। प्रत्येक स्थान पर श्रद्...