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बड़वारा से जिला स्तर तक पहचान, रितेश त्रिपाठी बने भाजपा आईटी सेल कटनी के सह-संयोजक, बोले जन-जन तक पहुँचाएँगे सरकार की नीतियाँ

 बड़वारा से जिला स्तर तक पहचान, रितेश त्रिपाठी बने भाजपा आईटी सेल कटनी के सह-संयोजक, बोले जन-जन तक पहुँचाएँगे सरकार की नीतियाँ कटनी  |  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठनात्मक ढांचे को अत्याधुनिक तकनीक, सोशल मीडिया रणनीति और डिजिटल संचार प्रणाली से लैस करने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश एवं केंद्रीय नेतृत्व के दिशा-निर्देशानुसार, कटनी जिले के बड़वारा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ढीमरखेड़ा मंडल निवासी ऊर्जावान एवं युवा कार्यकर्ता रितेश त्रिपाठी को भाजपा आईटी सेल का कटनी जिला सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। इस महत्वपूर्ण नियुक्ति की घोषणा के बाद से ही जिले के राजनीतिक गलियारों, विशेष रूप से भाजपा कार्यकर्ताओं और युवा वर्ग में उत्साह की एक नई लहर देखी जा रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रितेश त्रिपाठी की नियुक्ति से न केवल कटनी जिले में पार्टी का डिजिटल नेटवर्क सशक्त होगा, बल्कि बड़वारा एवं ढीमरखेड़ा जैसे क्षेत्रों में युवा नेतृत्व को एक नई पहचान भी मिलेगी। *संगठनात्मक निर्णय और युवा नेतृत्व पर भरोसा* समकालीन राजनीति में भारतीय जनता पार्टी अपने...

भाजपा आईटी सेल के कटनी जिला सह-संयोजक बने रितेश त्रिपाठी, क्षेत्र में हर्ष की लहर

 भाजपा आईटी सेल के कटनी जिला सह-संयोजक बने रितेश त्रिपाठी, क्षेत्र में हर्ष की लहर  कटनी ।  भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन को डिजिटल मंच पर और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बड़ी नियुक्ति की है।पार्टी ने बड़वारा विधानसभा क्षेत्र के ढीमरखेड़ा मंडल अंतर्गत रहने वाले युवा नेता रितेश त्रिपाठी को भाजपा आईटी सेल का नया जिला सह-संयोजक नियुक्त किया है। रितेश त्रिपाठी की इस नियुक्ति की सूचना मिलते ही स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिला। खबर सार्वजनिक होते ही भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, विभिन्न सामाजिक संगठनों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई व शुभकामनाएँ दीं। पार्टी नेताओं ने विश्वास जताया कि रितेश त्रिपाठी अपनी नई जिम्मेदारी के साथ डिजिटल माध्यमों के जरिए भाजपा की नीतियों, विचार और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जिले के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। अपनी नियुक्ति पर रितेश त्रिपाठी ने पार्टी के शीर्ष और प्रांतीय नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संगठन ने उन पर जो विश्वास जताया है, वे उस पर...

आदिवासियों से छीना जा रहा हैं आदिवासियों की आईटीआई का हक, उमरियापान में आईटीआई भवन बनाने की साजिश, ढीमरखेड़ा में ही बने आईटीआई भवन आदिवासी अंचल के अधिकारों और भविष्य की लड़ाई, आदिवासी अंचल में उठती अधिकार और स्वाभिमान की आवाज, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की बातों को भी ठुकरा रहे हैं कुछ तथाकथित लोग

 आदिवासियों से छीना जा रहा हैं आदिवासियों की आईटीआई का हक, उमरियापान में आईटीआई भवन बनाने की साजिश, ढीमरखेड़ा में ही बने आईटीआई भवन आदिवासी अंचल के अधिकारों और भविष्य की लड़ाई, आदिवासी अंचल में उठती अधिकार और स्वाभिमान की आवाज, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की बातों को भी ठुकरा रहे हैं कुछ तथाकथित लोग  ढीमरखेड़ा  |  कटनी जिले का ढीमरखेड़ा जनपद क्षेत्र एक प्रमुख आदिवासी बाहुल्य अंचल है। वर्षों से विकास की मुख्यधारा से दूर रहे इस क्षेत्र में जब औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) की स्वीकृति मिली थी, तब स्थानीय युवाओं और नागरिकों में उम्मीद की एक नई किरण जगी थी। लेकिन वर्तमान में इस संस्थान के भवन निर्माण के स्थान को लेकर उत्पन्न हुए विवाद ने एक बार फिर क्षेत्रीय उपेक्षा और प्रशासनिक अदूरदर्शिता को उजागर कर दिया है। युवा जनकल्याण मोर्चा ने इस मुद्दे को पूरी प्रखरता के साथ उठाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि जिस आईटीआई का आवंटन ढीमरखेड़ा के नाम से हुआ है, उसका भवन निर्माण हर हाल में ढीमरखेड़ा की भौगोलिक सीमा के भीतर ही होना चाहिए। मोर्चा ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है क...

क्या राजनीति अब सेवा नहीं, केवल स्वार्थ का माध्यम बन गई है, सफेद कुर्ते के पीछे छिपा भ्रष्टाचार, नेतागिरी या स्वार्थ की राजनीति, राजनीति में सेवा का भाव या सत्ता का लालच, क्या राजनीति अब ईमानदार लोगों के लिए नहीं रही, क्या राजनीति भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा मंच बन गई है राजनीति में बढ़ता स्वार्थ और धुंधलाती जनसेवा क्या सादगी के पहरावे के पीछे छिपा है निजी हित?

 क्या राजनीति अब सेवा नहीं, केवल स्वार्थ का माध्यम बन गई है, सफेद कुर्ते के पीछे छिपा भ्रष्टाचार, नेतागिरी या स्वार्थ की राजनीति, राजनीति में सेवा का भाव या सत्ता का लालच, क्या राजनीति अब ईमानदार लोगों के लिए नहीं रही, क्या राजनीति भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा मंच बन गई है राजनीति में बढ़ता स्वार्थ और धुंधलाती जनसेवा क्या सादगी के पहरावे के पीछे छिपा है निजी हित? कटनी । आज के आधुनिक दौर में भारतीय लोकतंत्र एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। एक तरफ जहां संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत राजनीति को जनसेवा, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक कल्याण का सबसे पवित्र और सशक्त माध्यम माना गया है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता के बीच राजनीति और राजनेताओं की छवि को लेकर असंतोष व अविश्वास का भाव तेजी से गहराता जा रहा है। कटनी जिले सहित पूरे देश के आम जनमानस में आज यह चर्चा और धारणा तेजी से मजबूत होती जा रही है कि राजनीति का मूल उद्देश्य अब 'जनसेवा' न रहकर मुख्य रूप से 'व्यक्तिगत लाभ', 'सत्ता की लोलुपता' और 'स्वार्थ पूर्ति' का जरिया बनता जा रहा है।अक्सर यह देखा जाता है कि चु...

आर्थिक आधार पर आरक्षण और धर्म परिवर्तन पर सख्त नीति की मांग कटनी में उग्र आंदोलन की चेतावनी

 आर्थिक आधार पर आरक्षण और धर्म परिवर्तन पर सख्त नीति की मांग कटनी में उग्र आंदोलन की चेतावनी कटनी |  देश में आरक्षण नीति की पुनर्समीक्षा और उसमें व्यापक बदलाव को लेकर एक बार फिर स्वर मुखर होने लगे हैं। मध्य प्रदेश के कटनी जिले से जुड़ी एक प्रमुख सामाजिक हलचल में, खम्हरिया के भूतपूर्व सरपंच एवं वरिष्ठ समाजसेवी रतन यादव तथा समाजसेवी आशीष (सोनू) गौतम ने आरक्षण व्यवस्था के मौजूदा ढांचे पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में मांग की है कि देश में आरक्षण का लाभ केवल और केवल आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए, ताकि जाति या वर्ग के परे हटकर समाज के हर उस व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं और अवसरों का लाभ पहुँच सके, जो वास्तव में गरीब और साधनहीन है।इसके साथ ही, दोनों समाजसेवियों ने एक अन्य संवेदनशील मुद्दे को उठाते हुए सरकार से यह मांग भी की है कि धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्तियों को आरक्षण का लाभ तुरंत प्रभाव से बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शासन-प्रशासन ने इन मांगों पर शीघ्र ही कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो वे व्यापक जनसमर्थन के साथ एक उग्र आंदोलन शुरू...

देश बनाने वाला मजदूर, फिर भी सबसे मजबूर जिसका पसीना सबसे कीमती, उसकी ज़िंदगी सबसे सस्ती श्रम का शोषण और व्यवस्था की बेफ़िक्री देश की रीढ़ ही बदहाली की ज़ंजीरों में जकड़ी है

 देश बनाने वाला मजदूर, फिर भी सबसे मजबूर जिसका पसीना सबसे कीमती, उसकी ज़िंदगी सबसे सस्ती श्रम का शोषण और व्यवस्था की बेफ़िक्री देश की रीढ़ ही बदहाली की ज़ंजीरों में जकड़ी है कटनी  |  जिस देश की गगनचुंबी इमारतें मजदूर की छाती पर बनी हों, जहाँ के हाईवे और एक्सप्रेसवे पसीने की एक-एक बूँद को सोखकर बने हों, उसी देश में मजदूर सबसे ज़्यादा उपेक्षित, लाचार और अधिकार-विहीन है। कटनी से लेकर देश के कोने-कोने तक की यही कड़वी और ख़ौफ़नाक हकीक़त है—जो हाथ देश की अर्थव्यवस्था का पहिया घुमाते हैं, वे अपने बच्चों की थाली में दो वक़्त की रोटी सजाने के लिए रोज़ तिल-तिल मरने को मजबूर हैं। यह केवल एक आर्थिक समस्या नहीं है; यह उस खोखली व्यवस्था, राजनीतिक ढोंग और प्रशासनिक असंवेदनशीलता पर सीधा हमला है जो हर चुनाव में मजदूरों को 'विकास का नायक' बताती है और चुनाव बीतते ही उन्हें 'गंदगी की तरह' बुहारकर किनारे कर देती है। *पेट की आग और विरोध की बेबसी चुप रहने की मजबूरी* कटनी की इस जमीनी सच्चाई को ध्यान से देखिए—मजदूर अपनी पीड़ा सुनाने किसी मंच, किसी रैली या किसी हुक्मरान की चौखट तक क्यों नहीं पहु...

जिंदगी किराए का मकान है, एक दिन चाबी लौटानी ही पड़ेगी, इसलिए मोह कम, इंसानियत ज्यादा रखिए

 जिंदगी किराए का मकान है, एक दिन चाबी लौटानी ही पड़ेगी, इसलिए मोह कम, इंसानियत ज्यादा रखिए कटनी  |  मानव जीवन प्रकृति का सबसे अनमोल और अद्भुत उपहार है। परंतु इस जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि यह अत्यंत क्षणभंगुर है। जो आज है, वह कल नहीं होगा, जो जन्म लेता है, उसका अंत भी निश्चित है।हम इस संसार में एक यात्री की तरह आते हैं, कुछ समय ठहरते हैं और फिर अपनी यात्रा पूरी करके चले जाते हैं।यदि गहराई से विचार किया जाए, तो यह संपूर्ण संसार एक सराय की तरह है और हमारा यह शरीर तथा जीवन एक किराए के मकान के समान है। जिस प्रकार किराए के मकान में रहने वाला व्यक्ति जानता है कि वह उस घर का स्थायी मालिक नहीं है और एक न एक दिन उसे वह मकान खाली करके उसकी चाबी मकान मालिक को लौटानी ही होगी, ठीक उसी प्रकार इस धरा पर हमारा प्रवास भी सीमित है। कालचक्र का बुलावा आते ही हमें यह सांसारिक शरीर और इसके तमाम साजो-सामान यहीं छोड़कर जाना पड़ता है। *भौतिकता की अंधी दौड़ में भटकता मानव* आज का आधुनिक समाज भौतिक सुख-सुविधाओं और धन-संपत्ति के संचय की अंधी दौड़ में इतनी तेज़ी से भाग रहा है कि वह जीवन के मूलभू...